श्रीदत्तगंज(बलरामपुर(राष्ट्र की परम्परा) ।विकास खण्ड श्रीदत्तगंज के पचासों गांव के जानवरों के स्वास्थ्य का जिम्मा मात्र एक पशु चिकित्साधिकारी के सहारे संचालित हो रहा है। यहा पर तैनात एक फार्मेसिस्ट अक्सर चिकित्सालय से गायब रहते हैं।विकास खण्ड श्रीदत्तगंज कार्यालय परिसर में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय श्रीदत्तगंज में पचासों गांवों के पशु पालक अपने गाय, भैंस बकरी, सूकर का इलाज कराने इस चिकित्सालय पर आते हैं परन्तु उनके इलाज के लिए मात्र एक पशु चिकित्साधिकारी तैनात हैं।
शासन ने दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने व बेसहारा जानवरो के लिए सेक्ड शओर्टएड सीमेन योजना लागू की है। इस योजना में इस चिकित्सालय में ढाई माह तक सीमेन उपलब्ध रहता है। इसमें साधारण सीमेन 30 रुपए में मिलता है। वहीं नया सीमेन सरकारी रेट पर 350 रुपए में मिलता है। इसकी सफलता की दर अधिक होने पर इसे कृत्रिम गर्भाधान में अधिक उपयोग किया जाता है। जिससे नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलती है। पशु पालन विभाग द्वारा इस कृत्रिम गर्भाधान योजना का व्यापक प्रचार न किए जाने से पशु पालकों को इसका लाभ कम मिल पाता है। पशु चिकित्सालय श्रीदत्तगंज में स्टाफ की कमी होने पर पचासों गांवों के पशुओं की समुचित देख रेख नहीं हो पाता है। विकास खण्ड श्रीदत्तगंज क्षेत्र में चार पशु चिकित्सालय कार्यरत हैं। लेकिन न्याय पंचायत स्तर पर पशु मित्र की तैनाती न होने से किसान ऊंचे दाम पर क्षोला छाप डाक्टरों से अपने पशुओं का इलाज कराते हैं। पशु पालक किसान राम दुलारे,जमी अहमद, गुलाम रसूल,शिव कुमार ने बताया कि सरकार गांव गांव पशु चिकित्सकों को भेजकर पशुओं का इलाज करने का निर्देश है परन्तु स्टाफ की कमी से योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। विकास खण्ड श्रीदत्तगंज के पचासों गांव के जानवरों के स्वास्थ्य का जिम्मा मात्र एक पशु चिकित्साधिकारी के सहारे संचालित हो रहा है। यहा पर तैनात एक फार्मेसिस्ट अक्सर चिकित्सालय से गायब रहते हैं।
ब्लॉक कार्यालय परिसर में स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय के तहत पचासों गांवों के पशु पालक अपने गाय, भैंस बकरी, का इलाज कराने इस चिकित्सालय पर आते हैं परन्तु उनके इलाज के लिए मात्र एक पशु चिकित्साधिकारी तैनात हैं।
शासन ने दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने व बेसहारा जानवरो के लिए सेक्ड शओर्टएड सीमेन योजना लागू की है। इस योजना में इस चिकित्सालय में ढाई माह तक सीमेन उपलब्ध रहता है। इसमें साधारण सीमेन 30 रुपए में मिलता है। वहीं नया सीमेन सरकारी रेट पर 350 रुपए में मिलता है। इसकी सफलता की दर अधिक होने पर इसे कृत्रिम गर्भाधान में अधिक उपयोग किया जाता है। जिससे नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिलती है। पशु पालन विभाग द्वारा इस कृत्रिम गर्भाधान योजना का व्यापक प्रचार न किए जाने से पशु पालकों को इसका लाभ कम मिल पाता है। पशु चिकित्सालय में स्टाफ की कमी होने पर पचासों गांवों के पशुओं की समुचित देख रेख नहीं हो पाता है। क्षेत्र में चार पशु चिकित्सालय कार्यरत हैं। लेकिन न्याय पंचायत स्तर पर पशु मित्र की तैनाती न होने से किसान ऊंचे दाम पर क्षोला छाप डाक्टरों से अपने पशुओं का इलाज कराते हैं। पशु पालक किसान राम दुलारे,जमी अहमद, गुलाम रसूल,शिव कुमार ने बताया कि सरकार गांव गांव पशु चिकित्सकों को भेजकर पशुओं का इलाज करने का निर्देश है परन्तु स्टाफ की कमी से योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है।
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