संत कबीर नगर: गौ रक्षा के लिए बलिदान देने वाले वीरों की स्मृति, उपेक्षा का शिकार बीरा बाबा समाधि स्थल

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के नगर पंचायत धर्मसिंहवा क्षेत्र के मेंहदूपार गांव में स्थित बीरा बाबा समाधि स्थल को लेकर संरक्षण की मांग एक बार फिर उठी है। यह स्थल न केवल जनआस्था का केंद्र है, बल्कि गौ रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीरों के बलिदान का ऐतिहासिक प्रतीक भी है। इस संबंध में सेवानिवृत्त जज आरपी पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर समाधि स्थल के संरक्षण और अनुरक्षण की मांग की है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि ब्रिटिश शासन काल के दौरान गौ रक्षा के संघर्ष में बीरा सहित चार भाइयों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। मान्यता है कि बीरा बाबा आज भी जागृत ब्रह्मस्थान के रूप में प्रतिष्ठित हैं और यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इसके बावजूद यह ऐतिहासिक स्थल आज भी सरकारी उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।

आरपी पांडेय ने पत्र में बताया कि वर्ष 1850 से 1857 के बीच अंग्रेजों द्वारा कारतूसों में चर्बी के प्रयोग और गोवंश वध के दबाव को लेकर व्यापक असंतोष फैला हुआ था। उसी दौर में तत्कालीन बस्ती जिले के मेंहदूपार गांव निवासी चक्रपाणि शुक्ला के पुत्र बीरा, मोहन, रामा और टीकाराम ने गोवंश की रक्षा को सर्वोपरि मानते हुए संघर्ष का मार्ग चुना।

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चारों भाइयों ने गांव के पास बिरवा स्थान पर गौशाला की स्थापना कर गोवंशीय पशुओं का संरक्षण शुरू किया। इसकी जानकारी मिलते ही अंग्रेजी हुकूमत ने सैन्य टुकड़ी भेजी। संघर्ष के दौरान चारों भाइयों ने वीरगति प्राप्त की। उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार ग्रामीणों ने उन्हें गांव में ही भू-समाधि दी, जो आज बीरा बाबा समाधि स्थल के रूप में जानी जाती है।

पूर्व जज ने चिंता जताई कि इस ऐतिहासिक बलिदान को अब तक इतिहासकारों द्वारा उचित स्थान नहीं मिल सका, जिससे यह घटना इतिहास के पन्नों में दर्ज नहीं हो पाई। उन्होंने कहा कि यदि पर्यटन विभाग द्वारा बीरा बाबा समाधि स्थल का संरक्षण कराया जाए तो यह सामाजिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक गौरव को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

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Karan Pandey

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