संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर के निर्देश के क्रम में जिला कृषि अधिकारी पी0सी0 विश्वकर्मा ने बताया है कि समस्त प्रकार के उर्वरकों की बिक्री किसान की भूमि जोत एवं उगाई गई फसल की आवश्यकता के अनुपात में किया जाना है ताकि उर्वरक के अनावश्यक उपयोग एवं अवैध भंडारण एवं बिक्री को रोका जा सके। उन्होंने बताया कि उर्वरक बिक्री केंद्र वार उर्वरक बिक्री विवरण प्रतिदिन जनपद स्तर पर प्राप्त हो रही है, जिससे यह ज्ञात हो सकता है कि किस उर्वरक विक्रेता के द्वारा किस किसान को कितनी मात्रा में कौन सा उर्वरक बिक्री किया गया है।
उन्होंने समस्त उर्वरक विक्रेताओं को निर्देशित किया है कि किसानों को समस्त प्रकार के उर्वरक की बिक्री किसान की भूमि जोत एवं बोई गई फसल की आवश्यकता के अनुपात में ही की जाए। साथ ही समस्त उर्वरक विक्रेता डी0ए0पी0 उर्वरक के स्थान पर सिंगल सुपर फास्फेट उर्वरक की बिक्री को प्राथमिकता दें क्योंकि इसमें फास्फोरस के साथ-साथ कैल्शियम, सल्फर, जिंक एवं बोरॉन भी पाया जाता है, जो फसलों के लिए आवश्यक तत्व है। यदि किसी उर्वरक विक्रेता ने किसी किसान को उसकी निर्धारित भूमि जोत एवं बोई गई फसल की आवश्यकता के अनुपात से अधिक मात्रा में उर्वरक की बिक्री की जाती है, तो संबंधित उर्वरक विक्रेता के विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 की सुसंगत धाराओं में कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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