(मऊ से अमित त्रिपाठी की रिपोर्ट)

मऊ, (राष्ट्र की परम्परा) नगर पालिका परिषद मऊ की बोर्ड बैठक सोमवार को भारी हंगामे और विरोध प्रदर्शन की भेंट चढ़ गई। बैठक शुरू होते ही कई सभासदों ने व्यवस्था और कार्यशैली को लेकर कड़ा विरोध जताया और बैठक का बहिष्कार करते हुए जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। आरोपों की बौछार करते हुए सभासदों ने नगर पालिका प्रशासन पर भ्रष्टाचार, पक्षपातपूर्ण कार्यों और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया।

बैठक के एजेंडे में विभिन्न विकास कार्यों की स्वीकृति, बजट अनुमोदन तथा पिछली बैठकों की कार्यवाही की पुष्टि शामिल थी, लेकिन विपक्षी सभासदों के विरोध के चलते कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका।

सभासदों का कहना था कि नगर पालिका द्वारा बिना सलाह-मशविरा के कार्य कराए जा रहे हैं, और बोर्ड सदस्यों को जानबूझकर अंधेरे में रखा जा रहा है। कुछ सदसदों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं और भ्रष्टाचार चरम पर है।

सभासद हाशिम अली ने कहा, “नगर पालिका के अधिकारी अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचा रहे हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर आम जनता को कोई सुविधा नहीं मिल रही है।”

वहीं, नगर पालिका अध्यक्ष ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि “बैठक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत बुलाई गई थी, लेकिन कुछ लोग राजनीति कर माहौल बिगाड़ना चाहते हैं। सभी कार्य नियमानुसार किए जा रहे हैं।”

हंगामे के कारण बैठक को समय से पहले स्थगित कर दिया गया। स्थिति को देखते हुए मौके पर पुलिस बल भी बुलाना पड़ा ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

नगर पालिका में इस तरह के गतिरोध से शहर के विकास कार्यों पर प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन और विरोधी सभासदों के बीच तालमेल बनता है या टकराव और गहराता है।