
नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) संसद के मानसून सत्र में सोमवार को तब नया मोड़ आ गया जब ऑपरेशन सिंदूर पर प्रस्तावित चर्चा से ठीक पहले विपक्षी दलों ने हंगामा कर दिया, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इस घटनाक्रम पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष को आड़े हाथों लिया।
रिजिजू ने मीडिया से बातचीत में कहा, “सरकार पूरी तरह से चर्चा के लिए तैयार थी। लेकिन ठीक चर्चा शुरू होने से 10 मिनट पहले विपक्ष ने एक नया एजेंडा सामने रख दिया। उन्होंने मांग की कि सरकार एक निश्चित समय-सीमा घोषित करे कि इसके बाद विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा की जाएगी। यह रवैया सिर्फ चर्चा से भागने की कोशिश है।”
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार खुद किसी संवेदनशील और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषय पर खुलकर चर्चा करने को तैयार है, तो विपक्ष पीछे क्यों हट रहा है? रिजिजू ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा,
“ऑपरेशन सिंदूर जैसे महत्वपूर्ण विषय पर बहस से बचने का मतलब साफ है – या तो उनके पास कहने को कुछ नहीं है या वे ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।”
क्या है ऑपरेशन सिंदूर?
सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर हाल ही में भारत की एक खुफिया एजेंसी द्वारा सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ की गई रणनीतिक कार्रवाई का नाम है, जो सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील मानी जा रही है। इस पर सरकार का पक्ष, और विपक्ष की आलोचनात्मक दृष्टि, दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।
SIR को लेकर विवाद बना रहा मुद्दा
विपक्ष की मांग है कि संसद में पहले वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर चर्चा कराई जाए, जिसे लेकर विपक्षी दल चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर भी संसद में जोरदार गतिरोध बना हुआ है।
लोकसभा अध्यक्ष की सख़्त टिप्पणी
लोकसभा में हंगामे के बीच स्पीकर ओम बिरला ने भी नाराजगी जताई। उन्होंने विपक्षी नेताओं से कहा,”जनता ने आपको पोस्टर और तख्तियां लहराने के लिए नहीं, बल्कि सार्थक बहस के लिए संसद में भेजा है।”
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में जहां एक ओर राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषय पर चर्चा की दरकार है, वहीं दूसरी ओर दलगत राजनीति संसद की कार्यवाही को बार-बार बाधित कर रही है। ऑपरेशन सिंदूर पर बहस टलने से यह सवाल फिर उठ खड़ा हुआ है—क्या विपक्ष वास्तव में जवाब चाहता है, या सिर्फ मुद्दों को उलझाना चाहता है?
