सड़कें तेज़ी से बन रही हैं, लेकिन सुरक्षा पीछे छूट गई – हर साल लाखों ज़िंदगियाँ दांव पर

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)भारत आज गर्व से दुनिया को बता रहा है कि वह सबसे तेज़ी से सड़कें बनाने वाला देश है। हर महीने हज़ारों किलोमीटर नई सड़कें बिछ रही हैं, एक्सप्रेसवे और हाईवे का जाल लगातार फैल रहा है। यह उपलब्धि निस्संदेह विकास की रफ्तार का प्रतीक है।

लेकिन इस उपलब्धि के पीछे एक कटु और दर्दनाक सच्चाई भी छिपी है – भारत में हर साल सड़क दुर्घटनाओं में लाखों लोगों की जान चली जाती है। सुबह से लेकर शाम तक, अख़बारों और चैनलों पर सड़क हादसों की खबरें सुर्खियों में छाई रहती हैं।

तेज़ रफ्तार बनाम सुरक्षित सफर – एक विडंबना विडंबना यह है कि जिस देश में सड़क निर्माण की गति को वैश्विक मानकों पर गिना जाता है, वहीं सड़क सुरक्षा की हालत दुनिया में सबसे खराब है। नई-नई सड़कें बन रही हैं, मगर उन सड़कों पर चलने वाले यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही।

नीतियाँ केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर तक सीमित दिखाई देती हैं, जबकि मानवीय जीवन की सुरक्षा को दरकिनार कर दिया गया है। सवाल यह उठता है कि आखिर खामी कहाँ है? समस्या की जड़ें

मोटर व्हीकल एक्ट में सख्त प्रावधान तो हैं, लेकिन अधिकतर राज्य इन्हें आधे-अधूरे तरीके से लागू करते हैं।

हाईवे पर तेज़ रफ्तार के लिए तो जगह है, मगर पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और ग्रामीण यातायात के लिए सुरक्षित लेन का अभाव है।शराब पीकर गाड़ी चलाना, हेलमेट और सीट बेल्ट न पहनना आम बात बन चुकी है। दुर्घटना के बाद समय पर इलाज न मिलना मौतों की सबसे बड़ी वजह है।

तेज़ रफ्तार = विकास? या सुरक्षित रफ्तार = सतत विकास? ऐसा लगता है मानो सरकारों ने यह मान लिया है कि तेज़ रफ्तार ही विकास है, जबकि हकीकत यह है कि सुरक्षित रफ्तार ही सतत विकास है। यदि हर साल लाखों लोग इन सड़कों पर मरते रहेंगे, तो क्या इन्हें असली प्रगति कहा जा सकता है?

आगे की राह क्या हो? विशेषज्ञों का मानना है कि अब सड़क सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए। इसके लिए ज़रूरी है कि–नए हाईवे और एक्सप्रेसवे का डिज़ाइन मानव जीवन केंद्रित हो।

स्कूल स्तर से ट्रैफिक शिक्षा अनिवार्य की जाए। हर दुर्घटना स्थल से 50 किमी के दायरे में ट्रॉमा सेंटर और एंबुलेंस नेटवर्क सुनिश्चित किया जाए। ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाए।

Editor CP pandey

Recent Posts

22 अक्टूबर का इतिहास: भाखड़ा-नांगल परियोजना से चंद्रयान-1 तक, जानिए इस दिन की प्रमुख घटनाएं

लेखक: अभिषेक कुमार 22 अक्टूबर का ऐतिहासिक महत्वइतिहास के पन्नों में 22 अक्टूबर की तारीख…

29 minutes ago

पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और सभी 12 राशियों का विस्तृत भविष्यफल

22 अक्टूबर 2026 राशिफल: पापांकुशा एकादशी पर इन 5 राशियों के खुल सकते हैं तरक्की…

31 minutes ago

आईआरआरआई में एक माह का प्रशिक्षण लेंगे गोरखनाथ विश्वविद्यालय के 22 विद्यार्थी

वाराणसी स्थित अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान में आधुनिक कृषि तकनीकों और नवाचारों की सीखेंगे बारीकियां…

3 hours ago

किसान दिवस में खाद की टैगिंग और ओवररेटिंग का मुद्दा उठा

नैनो यूरिया व नैनो डीएपी की टैगिंग पर किसानों ने जताई नाराजगी, भूमि की जरूरत…

3 hours ago

मां की प्रतिमा पहुंचते ही गूंजे पटाखे, रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाया आसमान

भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। लार थाना क्षेत्र के देवसिया गांव से मां की प्रतिमा भागलपुर…

3 hours ago

माता-पिता का साया छिना, अब जर्जर मकान के सहारे चार बहनों की जिंदगी

छत गिरने का खतरा, बरसात में टपकता है पानी; बेसहारा बहनों को आवास दिलाने के…

3 hours ago