सभ्य समाज की पहचान—जिम्मेदारी! पर अब यह गुण तेजी से गायब, उठ रहे गंभीर सवाल

✍️ कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सभ्य समाज की बुनियाद जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और आपसी सहयोग पर टिकती है। पर आज की परिस्थितियों को देखकर लगता है कि ये मूल्य धीरे-धीरे पीछे छूटते जा रहे हैं। आधुनिकता की भीड़ में सामाजिक जिम्मेदारियां खोती दिख रही हैं—और इसी के साथ समाज की वह पहचान भी धुंधली पड़ रही है, जिस पर हमेशा गर्व किया जाता था। गांव से लेकर शहर तक, सड़क से लेकर दफ्तर तक और परिवार से लेकर समाजिक संस्थाओं तक—हर जगह एक बात आम होती जा रही है कि लोग अपने कर्तव्यों से कतराते हैं और सिर्फ अधिकारों की बात करते हैं। नतीजा यह है कि व्यवस्था कमजोर हो रही है और समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। सफाई की जिम्मेदारी किसी की नहीं, ट्रैफिक नियम तोड़ना आम बात,सरकारी कार्यालयों में काम के प्रति लापरवाही, सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान, और समाजिक कार्यक्रमों में कम भागीदारी—ये सब संकेत हैं कि जिम्मेदारी का भाव कमजोर पड़ चुका है। लोग समस्या देखते हैं लेकिन पहल नहीं करते, गलत होता देखते हैं लेकिन आवाज उठाने में हिचकते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जिम्मेदारी का अभाव सिर्फ सामाजिक कमजोरी नहीं, बल्कि भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। जब समाज के लोग अपनी भूमिका निभाना छोड़ देंगे—व्यवस्था चरमरा जाएगी ,अपराध बढ़ेंगे, विश्वास बढ़ेगा,और आपसी संबंध कमजोर पड़ेंगे, जिम्मेदारी का अभाव परिवारों के भीतर भी देखने को मिल रहा है। बुजुर्गों की देख भाल से लेकर बच्चों को संस्कार देने तक—कई परिवार अपनी मूल जिम्मेदारियों से दूर होते जा रहे हैं नतीजा: पीढ़ियों के बीच दूरी, नैतिक मूल्यों में गिरावट और रिश्तों में कड़वाहट।
प्रशासनिक स्तर पर भी जिम्मेदारी की कमी आम जनता साफ तौर पर महसूस कर रही है। शिकायतें दर्ज होती हैं, पर समाधान में देरी, नियम बनते हैं,पर पालन में कमी,योजनाएं तैयार होती हैं,पर निगरानी कमजोर।ऐसे में जनता का सवाल बिल्कुल उचित है—अगर हर कोई जिम्मेदारी दूसरों पर डाल देगा,तो समाज किस राह पर जाएगा?
अब समय आ गया है कि समाज अपने मूल्यों की ओर लौटे,नागरिक अपने कर्तव्यों को समझें विभाग जिम्मेदारी से काम करें,
परिवार अपने रिश्तों का मान रखें,और हर व्यक्ति समाज में अपनी भूमिका निभाए। क्योंकि सभ्य समाज की असली पहचान उसके विकास में नहीं,उसकी जिम्मेदारी निभाने की क्षमता में होती है—और यही गुण आज फिर जगाने की जरूरत है।

Karan Pandey

Recent Posts

प्रो. अजय शुक्ला बने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के चीफ वार्डेन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के आचार्य प्रो. अजय…

9 hours ago

योग से स्वस्थ मातृत्व का संदेश, महिला चिकित्सालय में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के लिए विशेष शिविर

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस-2026 के तहत दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के महिला…

10 hours ago

ट्रैक्टर की चपेट में आने से वृद्ध की मौत, परिवार में मचा कोहराम

घर के बाहर निकलते समय बिगड़ा संतुलन- सड़क पर गिरने के बाद ट्रैक्टर से हुए…

10 hours ago

मोबाइल टावर पर चढ़ी महिला से मचा हड़कंप

लीलकर गांव में घंटों चला हाई-वोल्टेज ड्रामा, पुलिस महिला को सुरक्षित उतारने में जुटी सिकंदरपुर…

10 hours ago

लूट की कहानी निकली फिल्मी

सगी बड़ी भाभी ने ही रची थी साजिशपुलिस ने किया सनसनीखेज खुलासा,जेवर और नकदी बरामद…

10 hours ago

पीएम स्वनिधि योजना से छोटे व्यापारियों को मिली नई पहचान, लाभार्थी हुए सम्मानित

योजना के छह वर्ष पूरे होने पर लोक कल्याण मेला आयोजित,उत्कृष्ट पथ विक्रेताओं को मिला…

10 hours ago