भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। घाघरा नदी के जलस्तर में लगातार गिरावट शुरू होने से तटवर्ती गांवों के लोगों ने कुछ राहत महसूस की है। शनिवार को बाढ़ खंड के अभियंता विवेक कुमार ने बताया कि पिछले 24 घंटे में नदी का जलस्तर करीब 25 सेंटीमीटर घटा है। हालांकि जलस्तर कम होने के बावजूद तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।तेलिया कला से भागलपुर, देवसिया, सिद्धपुर और देवरहा बाबा कास्ट आश्रम तक का तटवर्ती इलाका अब भी बाढ़ के पानी से प्रभावित है। कई स्थानों पर खेत, संपर्क मार्ग और नदी किनारे के निचले हिस्से जलमग्न हैं। पानी का फैलाव कम होने के बावजूद ग्रामीणों को आवागमन, पशुओं के चारे और खेती से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।बाढ़ का असर पशु-पक्षियों और वन्यजीवों पर भी पड़ा है। खेतों और नदी किनारे के प्राकृतिक ठिकानों में पानी भरने के कारण जीव-जंतु सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटक रहे हैं। बाढ़ के दौरान मईल थाना क्षेत्र में जमुनिया घाट से नदी किनारे स्थित ईदगाह के बीच घाघरा की धारा में एक मृग बहता हुआ दिखाई दिया था। स्थानीय निवासी भोला साहनी ने उसे रेस्क्यू कर सुरक्षित अपने घर पहुंचाया। इस घटना ने बाढ़ के बीच वन्यजीवों की परेशानी को भी सामने ला दिया।देवरहा बाबा कास्ट आश्रम और तेलिया क्षेत्र में पानी का फैलाव अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है। कई स्थानों पर नदी का पानी तटबंधों और संपर्क मार्गों के करीब पहुंच गया है। इससे पहले भागलपुर-मईल मार्ग के तटबंध पर तीन रेनकट भी मिले थे, जिसके बाद ग्रामीणों में तटबंध की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी।जलस्तर में गिरावट से फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन तटवर्ती क्षेत्रों से पानी पूरी तरह निकलने तक स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। खेतों में जमा पानी, पशुओं के चारे की समस्या, आवागमन में दिक्कत और कटान का खतरा अभी बना हुआ है। ग्रामीणों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी, तटबंधों की सुरक्षा और मवेशियों व वन्यजीवों के संरक्षण की जरूरत बताई है।
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