

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय स्थित महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ द्वारा महाकुम्भ पर्व 2025 के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें महाकुम्भ पर्व 2025 पुस्तक का विमोचन, कुम्भ विषयक व्याख्यान एवं शोध प्रतियोगिता संपन्न हुई।
मुख्य अतिथि पूर्वोत्तर रेलवे के सेवानिवृत्त मुख्य परिचालन प्रबंधक रण विजय सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि कुम्भ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समन्वय का प्रतीक है। धर्म, संस्कृति और विज्ञान कुम्भ की गंगा, यमुना और सरस्वती की तरह हैं, जिनके संगम से समाज और राष्ट्र का निर्माण होता है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने पुस्तक को धरोहर बताते हुए इसके अंग्रेजी अनुवाद की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि शोधपीठ में शीघ्र ही पीएचडी की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
डॉ. कुशल नाथ मिश्र एवं डॉ. सोनल सिंह के संपादन में प्रकाशित इस पुस्तक में प्राचीन से आधुनिक स्वरूप तक कुम्भ के विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।
कार्यक्रम में शोध प्रतियोगिता का भी आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के 30 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। निर्णायक मंडल के मूल्यांकन के बाद डॉ. उमेश चंद तिवारी प्रथम, अभिषेक श्रीवास्तव द्वितीय तथा डॉ. कविता सिंह एवं कृतिका मल्ल तृतीय स्थान पर रहे।
कार्यक्रम में मणिपुर इन फ्लेम्स पुस्तक का भी विमोचन हुआ। संचालन डॉ. सोनल सिंह एवं डॉ. हर्षवर्धन सिंह ने किया।
इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्वानों के साथ गोरखपुर विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य डॉ. कुलदीपक शुक्ल, डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी, डॉ. सुनील कुमार, चिन्मयानन्द मल्ल, डॉ. हर्षवर्धन सिंह एवं अन्य शिक्षक-शोधार्थी उपस्थित रहे।