आजमगढ़ (राष्ट्र की परम्परा)l राजस्थान के भरतपुर ज़िले के घाटमिका पहाड़ी गांव से, 16 फ़रवरी को अपहरण करके कथित गौरक्षकों द्वारा “नासिर” और “जुनैद” की निर्मम पिटाई और फिर उन्हीं की गाड़ी में हरियाणा के भिवानी इलाके में ज़िंदा जलाने की घटना में अभी तक ना तो आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, और नाही सरकार ने पीड़ित परिवार को कोई मुआवजा व राहत प्रदान की है।
आजाद समाज पार्टी ने अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की थी, लेकिन राजस्थान और हरियाणा सरकारों ने इस प्रकरण में कोई ठोस कार्यवाही नहीं की, जिससे प्रतीत होता है कि इस घटना में सफेदपोश नेता अधिकारियों और पुलिस -प्रशासन की मिली भगत है। घटना में 2023-24 के राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर साम्प्रदायिक कार्ड खेलने की साजिश से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। राजस्थान प्रदेश में दलितों, आदिवासियों और मुस्लिम समाज के साथ लगातार हत्या, बलात्कार और शोषण की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं, और प्रदेश सरकार जातिगत कारण से मुआवजा और न्याय में भेदभाव कर रही है।
उदयपुर के कन्हैया हत्याकांड में मुख्यमंत्री खुद पीड़ित परिवार के घर जाकर 50 लाख मुआवजा और दो सरकारी नौकरी प्रदान करते हैं, लेकिन इसके उलट इंद्र मेघवाल, जितेन्द्र मेघवाल, ओमप्रकाश रैगर और कार्तिक भील के बाद अब नासिर और जुनैद हत्याकांड पर भी भेदभाव करते दिख रहे हैं। बहरहाल नासिर और जुनैद हत्याकांड गहरी साज़िश और षडयंत्र का हिस्सा प्रतीत होता है। इसलिए आज़ाद समाज पार्टी मांग करती है कि, पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच हो तथा उदयपुर कांड की तरह पीड़ित परिवार को तत्काल मुआवजा और सरकारी नौकरी मिलें, साथ ही साथ अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी हो और उनको सख़्त से सख़्त सज़ा सुनिश्चित हो, इसके साथ ही राजस्थान और हरियाणा के संबंधित क्षेत्र के लापरवाह और अपराधियों से मिली भगत के आरोपी पुलिस कर्मचारियों को सज़ा मिले। इस जघन्य हत्याकांड के बाद देश में वंचित वर्ग के अंदर भय का माहौल बना हुआ है।
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