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सोने के बदले कर्ज पर RBI के नए नियम: अब छोटे ग्राहकों को मिलेगा ज्यादा फायदा, जानें क्या बदलेगा?

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत में गोल्ड लोन मार्केट लगातार तेजी से बढ़ रहा है। सोने की कीमतों में उछाल और आसान कर्ज सुविधा की वजह से यह सेक्टर सालाना औसतन 30% की दर से विस्तार कर रहा है। इक्रा और आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2025 तक बैंकों और एनबीएफसी के गोल्ड लोन 2.94 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गए हैं। वहीं, सीआरआईएफ की रिपोर्ट बताती है कि जून 2025 तक गोल्ड लोन पोर्टफोलियो 13.4 लाख करोड़ रुपए का हो चुका है।

इसी बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी नई मौद्रिक नीति में गोल्ड लोन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। ये नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। बदलाव का मकसद है—छोटे ग्राहकों को राहत देना, पारदर्शिता बढ़ाना और डिफॉल्ट के जोखिम को कम करना।

RBI ने क्यों बदले गोल्ड लोन के नियम?

छोटे ग्राहकों (2.5 लाख तक) की हिस्सेदारी 60% है, औसत ऋण आकार ₹70,000।

सोना गिरवी रखने में गड़बड़ी, अनुचित मूल्यांकन और पारदर्शिता की कमी के मामले बढ़ रहे थे।

बैंक अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे थे और गिरवी सोने की नीलामी प्रक्रिया अस्पष्ट थी।

रोलओवर लोन यानी ब्याज चुकाकर कर्ज नवीनीकरण की प्रवृत्ति बढ़ रही थी, जिससे जोखिम बढ़ रहा था।

नए नियमों से क्या होगा फायदा?

  1. Loan-to-Value (LTV) Ratio बदला गया:

₹2.5 लाख तक के लोन पर LTV 85%

₹2.5 से ₹5 लाख तक के लोन पर 80%

₹5 लाख से अधिक के लोन पर 75%
यानी अब छोटे ग्राहकों को अधिक राशि के कर्ज की सुविधा मिलेगी।

  1. सोने का मूल्यांकन:

कीमत IBJA या SEBI दरों के अनुसार तय होगी।

30 दिन की औसत या पिछले दिन की न्यूनतम कीमत को आधार माना जाएगा।

  1. कर्ज की अदायगी:

पूरा लोन 12 महीने में ब्याज सहित चुकाना अनिवार्य होगा।

अब केवल ब्याज देकर लोन को आगे बढ़ाने की सुविधा (रोलओवर) नहीं मिलेगी।

  1. सोने की वापसी:

कर्ज चुकाने के बाद बैंक या NBFC को 7 कार्य दिवस में सोना लौटाना होगा।

देरी होने पर बैंक को ₹5,000 प्रति दिन का जुर्माना देना पड़ेगा।

  1. नीलामी में पारदर्शिता:

डिफॉल्ट के बाद ग्राहक को पहले से सूचना देना अनिवार्य होगा।

नीलामी का रिजर्व मूल्य बाजार दर के 90% पर तय किया जाएगा।

ग्राहकों के लिए जरूरी सावधानियां

लोन लेने से पहले सोने की शुद्धता और मूल्यांकन प्रमाणपत्र संभालकर रखें।

पहले से गिरवी रखे सोने को दोबारा गिरवी न रखें।

विभिन्न बैंकों और NBFC की ब्याज दरों की तुलना जरूर करें।


आरबीआई के नए नियम छोटे ग्राहकों के लिए राहत भरे हैं। अब उन्हें अधिक राशि का कर्ज, पारदर्शी मूल्यांकन और तेज सोना वापसी का फायदा मिलेगा। वहीं, बैंकों और एनबीएफसी को पारदर्शिता और अनुशासन का पालन करना होगा।

Karan Pandey

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