सोरायसिस सिर्फ त्वचा रोग नहीं बल्कि यह है एक आटोइम्यून रोग –डॉ बृजेश

समय से इलाज होने पर ठीक हो सकती है बीमारी

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)
विश्व सोरायसिस दिवस 29 अक्टूबर को प्रतिवर्ष पूरे विश्व में मनाया जाता है । इसका उद्देश्य सोरायसिस बीमारी व इसके इलाज के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।इस बीमारी में त्वचा पर गुलाबी रंग के चकत्ते बनने लग जाते हैं,जिन पर सफेद चाँदी के रंग की पपड़ी बनने लगती है और त्वचा में सूजन आ जाती है।अक्सर लोग इसे एक सामान्य त्वचा रोग समझ लेते हैं।जबकि यह एक ऑटोइम्यून रोग है,यानी ऐसी बीमारी जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर को बचाने की बजाय उसके ही स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचाने लग जाती है।त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ बृजेश सिंह ने बताया कि सोरायसिस एक ऑटोइम्यून सूजन वाली त्वचा की बीमारी है। यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है।इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती है जिसके कारण नई त्वचा कोशिकाएं 40 से 50 दिन में विकसित होने के बजाय केवल चार से पांच दिन में विकसित हो जाती हैं।त्वचा कोशिकाओं की तेज वृद्धि होने के कारण कोशिकाएं त्वचा की सतह पर ढेर हो जाती हैं जो देखने में चमकीली चांदी जैसे लगती हैं।बाद में यह त्वचा सहित शरीर से उखड़ जाती हैं।शरीर से त्वचा हट जाने से वह स्थान देखने में खराब लगता है।साथ ही त्वचा न रहने पर प्रदूषण,
वैक्टीरिया,वायरल आदि बाहरी संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।इसके अलावा शरीर पर त्वचा के न होने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है और तापमान गिर सकता है, जिसके कारण व्यक्ति को हाइपोथर्मीया हो सकता है। गंभीर अवस्था में बीमारी का प्रकोप हड्डियों व नाखूनों तक पहुंच जाता है।सोरायसिस का इलाज संभव–डॉ बृजेश सिंह ने बताया कि बीमारी का पता चलते ही इलाज करने से यह जल्दी ही ठीक हो सकती है।गंभीर स्थिति में इसका इलाज लंबे समय तक करना पड़ सकता है।दवाओं का पूरा कोर्स करने पर इसके निशान भी कुछ हद तक मिट जाते हैं। उन्होने बताया कि इस बीमारी के होने का कारण अभी तक ज्ञात नहीं हो सका है ,फिर भी इससे पीड़ित व्यक्ति को तंबाकू ,शराब या अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।साथ ही यदि रोगी शुगर का मरीज है तो उसके शुगर को कंट्रोल करना आवश्यक हो जाता है।एक दूसरे से नहीं फैलती बीमारी–डॉ बृजेश ने बताया कि यह बीमारी वयस्कों में ज्यादा पायी जाती है।बच्चों में इसका प्रभाव न के बराबर देखने को मिलता है।इसकी अच्छी बात यह है कि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती।सोरायसिस बीमारी में व्यक्ति मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रभावित होता है।शरीर के प्रभावित भाग पर त्वचा न रहने के कारण वह लोगों से दूर होने की कोशिश करता है। सोरायसिस से पीड़ित लोगों को अवसाद,अन्य मानसिक समस्याएं होने की संभावना बढ़ जाती है।

आइए हम जागरूकता फैलाएं और सोरायसिस से पीड़ित लोगों को सहायता प्रदान करें डॉ सतीश कुमार सिंह मुख्य चिकित्सा अधिकारी- बहराइच

rkpnews@somnath

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