लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। प्रदेश के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सर्टिफिकेट धारकों को इंजीनियरिंग डिग्रीधारकों के समकक्ष मानते हुए अनुदेशक एवं फोरमैन को प्रधानाचार्य बना दिया गया। इस अनियमित पदोन्नति की शिकायत के बाद अब प्रशिक्षण निदेशालय ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, निदेशालय ने ऐसे 18 प्रधानाचार्यों को 10 अक्टूबर को अभिलेखों सहित वित्त नियंत्रक कार्यालय, निदेशालय लखनऊ में तलब किया है। यह सभी अधिकारी प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत हैं।
इनमें चंदौली, बदायूं (बिसौली), संत कबीर नगर (मेहदावल), बागपत (खेकड़ा), कासगंज, औरैया (अजीतमल), रायबरेली (ऊंचाहार), कौशांबी (सिराथू), सिद्धार्थनगर (नौगढ़), उन्नाव (फतेहपुर चौरासी, पुरवा), लखनऊ (मोहनलालगंज), जालौन (कोंच), हापुड़, कानपुर (कल्याणपुर), अमरोहा, बदायूं एवं झांसी के आईटीआई प्रधानाचार्य शामिल बताए जा रहे हैं।
नियमों के अनुसार प्रधानाचार्य पद के लिए इंजीनियरिंग में डिग्री अनिवार्य है, जबकि कई पदोन्नत अधिकारियों के पास केवल तकनीकी सर्टिफिकेट हैं। शिकायतों के आधार पर न्यायालय में मामला विचाराधीन है और अब जांच से कई बड़े नामों के खुलासे की संभावना जताई जा रही है।
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