Monday, July 20, 2026
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कमिश्नरी में ‘शान’ के नाम पर अराजक पार्किंग नियमों को ठेंगा दिखाते वाहन चाल

अपने दरवाजे पर खड़ी गाड़ी हो तो आपत्ति, सार्वजनिक परिसर में क्यों नहीं?

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
कमिश्नरी परिसर में कुछ लोगों की मनमानी अब खुलेआम व्यवस्था को चुनौती देती नजर आ रही है। चारपहिया वाहनों को बेतरतीब ढंग से खड़ा करना यहां कुछ लोगों की आदत ही नहीं, बल्कि ‘शान’ बन चुका है। हैरानी इस बात की है कि ऐसे लोगों पर न तो नियमों का कोई असर दिखता है और न ही प्रशासनिक निर्देशों का।
विडंबना देखिए—अगर यही गाड़ी किसी के अपने घर के दरवाजे पर खड़ी कर दी जाए, तो तुरंत आपत्ति शुरू हो जाती है। रास्ता जाम होने, असुविधा होने और निजी दायरे में दखल की बातें उठाई जाती हैं। लेकिन जब बात कमिश्नरी जैसे सार्वजनिक और संवेदनशील परिसर की आती है, तो वही लोग दूसरों की परेशानी और सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं। यह दोहरा व्यवहार न सिर्फ अनुशासनहीनता है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी से भी मुंह मोड़ना है।
कमिश्नरी में रोजाना सैकड़ों फरियादी अपनी समस्याएं लेकर आते हैं। बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांगजन—सभी को इन बेतरतीब खड़ी गाड़ियों के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मुख्य मार्ग और इमरजेंसी रास्ते तक अवरुद्ध हो जाते हैं। अगर किसी समय एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड को अंदर जाना पड़े, तो यही वाहन सबसे बड़ी बाधा बन सकते हैं। ऐसे में यह लापरवाही सीधे-सीधे जान जोखिम में डालने जैसी है।
कई कर्मचारियों का कहना है कि कुछ लोग खुद को नियमों से ऊपर समझते हैं, जिससे कार्रवाई भी प्रभावी नहीं हो पाती। यही वजह है कि बार-बार चेतावनी के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। अब जरूरत केवल अपील की नहीं, बल्कि सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई की है।
प्रशासन को चाहिए कि अवैध पार्किंग पर तुरंत जुर्माना, व्हील लॉक और टोइंग जैसी सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे। साथ ही स्पष्ट संकेतक और पार्किंग व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाए, ताकि कोई बहाना न बचे। सबसे जरूरी है—कानून सबके लिए बराबर है, यह संदेश जमीनी स्तर पर लागू होता दिखे।
सार्वजनिक स्थल पर अनुशासन ही असली ‘शान’ है, न कि मनमानी। अगर अपने दरवाजे पर खड़ी गाड़ी से आपत्ति होती है, तो कमिश्नरी में दूसरों को परेशानी देना कैसे सही हो सकता है? समय रहते सुधार जरूरी है, वरना यह लापरवाही किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है।

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