टापू बने गांव, पानी बना पहरेदार, सोहगी बरवां में विकास की राह अब भी अधूरी

रोहुआ नाला पार करना रोज की मजबूरी, स्कूल तक पहुंचने में भी जल-भराव का रोड़ा, नारायणी बढ़ी तो संपर्क कटने का डर

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। विकास की रफ्तार भले ही गांव-गांव तक पहुंचने के दावे किए जा रहे हों, लेकिन जनपद के अंतिम छोर पर स्थित सोहगी बरवां क्षेत्र के तीन गांवों की तस्वीर इन दावों से अलग नजर आती है। नारायणी नदी के बीच टापू जैसे हालात में बसे इन गांवों के ग्रामीणों के लिए बारिश का मौसम राहत से ज्यादा परेशानी लेकर आता है। गांव के मुख्य प्रवेश मार्ग पर स्थित रोहुआ नाला जल-भराव के कारण आवागमन में बड़ी बाधा बना हुआ है। रास्ता बाधित होने पर ग्रामीणों के सामने पानी में उतरकर नाला पार करने या नाव का सहारा लेने के अलावा विकल्प सीमित रह जाता है।
बारिश के दिनों में यह समस्या बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए और गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में जल निकासी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने से कई स्थानों पर पानी और गंदगी जमा रहती है। इसका असर विद्यालय आने-जाने वाले विद्यार्थियों पर भी पड़ रहा है। स्कूल के मुख्य द्वार के आस-पास जल- भराव के कारण बच्चों को पानी के बीच से होकर विद्यालय पहुंचना पड़ता है।ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, पुलिया, जल निकासी और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाएं आज भी उनकी प्राथमिक जरूरत बनी हुई हैं। चुनाव के दौरान गांव में जनप्रतिनिधियों की सक्रियता बढ़ती है और समस्याओं के समाधान के आश्वासन मिलते हैं, लेकिन चुनाव बाद अपेक्षित गति से काम न होने की शिकायत ग्रामीण करते हैं। उनका कहना है कि उन्हें किसी बड़ी सुविधा से पहले गांव तक सुरक्षित और सुगम रास्ता चाहिए।
नेपाल क्षेत्र में बारिश और आपदा की स्थिति के बाद नारायणी नदी के जल स्तर को लेकर ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। नदी का पानी बढ़ने पर पहले से सीमित संपर्क व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। ऐसी स्थिति में बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना, बच्चों को सुरक्षित स्थान तक ले जाना या किसी आपात स्थिति में मदद पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से रोहुआ नाले पर स्थायी आवागमन की व्यवस्था कराने, जल निकासी की समस्या दूर करने, विद्यालय के आस-पास जल- भराव रोकने और गांवों को सुरक्षित सड़क संपर्क से जोड़ने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि हर बरसात में नाव और पानी के सहारे जिंदगी चलाने के बजाय उन्हें ऐसी स्थायी व्यवस्था चाहिए, जिससे मौसम बदलने के साथ उनका रास्ता न बदले।

rkpNavneet Mishra

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