Friday, February 20, 2026
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जनपद में विभिन्न जगहों पर आपातकाल को लेकर आयोजित किए गए कार्यक्रम

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में जगह–जगह 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल को लेकर जनपद में विभिन्न कार्यालयों और सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में आपातकाल में की गई त्रासदियों ,विपत्तियों को लेकर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आपातकाल और लोकतंत्र पर इसके दुष्प्रभावों को लेकर गोष्ठी का आयोजन किया गया।
उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र के लिए आपातकाल एक आपदा की तरह था। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मतदान जैसे मौलिक और अहम अधिकार लोकतंत्र की आत्मा होते हैं, लेकिन आपतकाल में ये अधिकार छीन लिए गए थे। एक नागरिक के रूप में हमे सतर्क और जागरूक होने की आवश्यकता है, ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों और अधिकारों को सुरक्षित रखा जा सके। एक जागरूक नागरिक ही लोकतंत्र की रक्षा कर सकता है और आपातकाल जैसी घटना को होने से रोक सकता है।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि आपातकाल जैसी घटनाएं किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए शुभ घटना नहीं है। प्रजातंत्र लोक के मत और इच्छा से चलता है, लेकिन आपतकाल निर्णय लोकमत और लोकइच्छा के आ गला घोंटने का कार्य करता है। एक सजग नागरिक के रूप में ऐसे किसी प्रयास का विरोध हमारी जिम्मेदारी है।
इससे पूर्व जिलाधिकारी सहित सभी अधिकारियों और आमजन द्वारा इस अवसर पर आयोजित चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया। इसके अलावा हस्ताक्षर पट्ट पर लोगों ने अपना–अपना संदेश लिखकर हस्ताक्षर भी किया।
इसके अलावा जनपद के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और कार्यालयों में गोष्ठी, भाषण, चित्रकला सहित विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
इस दौरान गोष्ठी में जिला विकास अधिकारी बी.एन. कन्नौजिया, परियोजना निदेशक रामदरश चौधरी, उपायुक्त उद्योग अभिषेक प्रियदर्शी, एआर सहकारिता सुनील गुप्ता, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी कन्हैया यादव सहित अन्य सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित रहें।

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