देवरिया के चर्चित डॉक्टर की याचिका खारिज
प्रयागराज।(राष्ट्र की परम्परा) इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में निजी अस्पतालों की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “निजी अस्पताल अब मरीजों को ‘एटीएम’ की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। वे मरीजों को इंसान नहीं, बल्कि पैसे निकालने की मशीन समझते हैं।” अदालत ने देवरिया के एक चर्चित चिकित्सकीय लापरवाही मामले में डॉक्टर की याचिका को खारिज करते हुए यह सख्त टिप्पणी की।
यह मामला वर्ष 2008 का है, जिसमें देवरिया जिले के एक निजी अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी में कथित देरी और लापरवाही के चलते गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई थी। पीड़ित परिवार की एफआईआर में डॉक्टर अशोक कुमार राय पर 8,700 रुपये लेने और फिर 10,000 रुपये और मांगने का आरोप लगाया गया था। इतना ही नहीं, परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पैसे न देने पर डॉक्टर ने डिस्चार्ज स्लिप देने से इनकार कर दिया और उनके साथ मारपीट भी की गई।
इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की एकल पीठ ने कहा कि “निजी अस्पतालों द्वारा ऐसे मामलों में दिखाई जा रही अमानवीयता और पैसे की लोलुपता गंभीर चिंता का विषय है। स्वास्थ्य सेवा एक सेवा कार्य है, व्यापार नहीं।”
कोर्ट ने डॉक्टर अशोक कुमार राय की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि प्रथमदृष्टया उनके खिलाफ लगे आरोप गंभीर हैं और ऐसे मामलों में न्यायिक जांच आवश्यक है। कोर्ट ने राज्य सरकार को मामले में निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के निर्देश भी दिए।
यह फैसला न सिर्फ चिकित्सा पेशेवरों को जिम्मेदारी का एहसास कराने वाला है, बल्कि आम जनता में भरोसा बहाल करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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