
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग में नवप्रवेशित विद्यार्थियों का अभिविन्यास कार्यक्रम उत्साहपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। प्राचार्य डॉ. ओम प्रकाश सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह महाविद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने का केंद्र ही नहीं, बल्कि मूल्य, संस्कार और जीवन-निर्माण का भी मंदिर है। आपने यहाँ प्रवेश लेकर एक सुनहरे भविष्य की नींव रखी है। महाविद्यालय का प्रत्येक कक्षा-कक्ष, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और खेल का मैदान आपको कुछ नया सिखाने के लिए तत्पर है। यह वह स्थान है जहाँ आपके सपने पंख लेंगे, आपकी कल्पनाएँ मूर्त रूप लेंगी और आपकी प्रतिभा निखर कर सामने आएगी। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अनुशासन, परिश्रम और सृजनशीलता को जीवन का मूलमंत्र बनाएं। विभागाध्यक्ष डॉ. निधि राय ने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए शिक्षा शास्त्र के महत्व और विभाग की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। डॉ. श्याम सिंह ने आत्म-विकास, चिंतन और शोध को विद्यार्थियों के लिए आवश्यक बताया। डॉ. त्रिभुवन मिश्रा ने शिक्षा शास्त्र को समाज परिवर्तन का साधन बताते हुए विद्यार्थियों को शोध एवं मूल्यपरक शिक्षा की ओर प्रेरित किया। डॉ. अखंड प्रताप सिंह ने अनुशासन और सृजनशीलता पर बल दिया, जबकि डॉ. सुजीत कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को जिज्ञासा और समय के सदुपयोग को जीवन का हिस्सा बनाने की सलाह दी। अभिविन्यास कार्यक्रम में नवप्रवेशित विद्यार्थियों ने भी अपनी उत्सुकता व्यक्त की। संचालन राधा गोड़ ने किया तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ सोनी, मुस्कान, दीपाली, श्वेता, काजल और कुमकुम ने दीं। अंत में आभार ज्ञापन डॉ. जागृति विश्वकर्मा ने किया। उक्त जानकारी डा. जितेंद्र पाण्डेय ने दी है।