
पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) बिहार सरकार ने राज्य में जमीन माफियाओं की मनमानी और अवैध कब्जों पर नकेल कसने की तैयारी तेज कर दी है। अब फर्जी कागजातों के आधार पर की गई जमीन की खरीद-बिक्री और अवैध कब्जे को लेकर कड़ी कार्रवाई होगी।
सरकारी निर्देशों के मुताबिक, ऐसे मामलों में यदि पुलिस या प्रशासन को संदेह होगा तो संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच-पड़ताल की जाएगी। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर इसे सामान्य दीवानी विवाद न मानते हुए आपराधिक मामले के रूप में दर्ज किया जाएगा। यानी, दोषी पाए जाने पर जमीन माफियाओं के खिलाफ वैसी ही कार्रवाई होगी जैसी गंभीर अपराधों में होती है।
अभी तक कई मामलों में जमीन विवाद को केवल सिविल कोर्ट का विषय मान लिया जाता था, जिसका फायदा उठाकर माफिया लोग वर्षों तक कब्जा जमाए रखते थे। लेकिन अब नई व्यवस्था लागू होने से न केवल माफियाओं पर नकेल कसी जाएगी, बल्कि आम लोगों को भी न्याय मिलना आसान होगा।
पुलिस प्रशासन रहेगा अलर्ट जमीन से जुड़े विवादित दस्तावेज पुलिस के संज्ञान में आते ही जांच की प्रक्रिया शुरू होगी। पुलिस व राजस्व विभाग की संयुक्त टीम दस्तावेजों की वैधता की जांच करेगी। फर्जीवाड़ा साबित होने पर आरोपियों के खिलाफ कठोर धाराओं में केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का सख्त रुख सूत्रों के अनुसार, सरकार का साफ निर्देश है कि भूमि विवाद के नाम पर माफिया किसी भी तरह से गरीब, किसान या आम लोगों को प्रताड़ित न कर सकें। मुख्यमंत्री स्वयं भूमि सुधार और भूमि विवाद निपटारे की प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं।
जनता को मिलेगा लाभ नई व्यवस्था से उन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जिनकी जमीन पर वर्षों से दबंग और माफिया कब्जा जमाए बैठे हैं। अब पुलिस सीधे हस्तक्षेप कर सकेगी और फर्जी दस्तावेजों पर आधारित कब्जों को हटाया जा सकेगा।