प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)प्रयागराज में चल रहा माघ मेला 2026 आस्था, तपस्या और आधुनिक दौर की सोशल मीडिया संस्कृति का अनोखा संगम बन गया है। शुक्रवार तक चलने वाली पंचकोसी परिक्रमा में साधु-संत श्रद्धा, अनुशासन और पारंपरिक नियमों के साथ पंचकोसी मार्ग पर भ्रमण कर रहे हैं। परिक्रमा के पहले दिन गंगा पूजन के पश्चात साधु-संतों का दल अक्षयवट और आदि शंकर विमान मंडपम मंदिर पहुंचा, जहां विधिवत दर्शन-पूजन के साथ दिन का समापन हुआ। अंतिम दिन साधु-संतों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन प्रस्तावित है।
माघ मेला प्रशासन के लिए यह आयोजन किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण यातायात, सुरक्षा और व्यवस्थाओं को संतुलित बनाए रखना प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारी बनी हुई है।
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इस वर्ष माघ मेले में आस्था के साथ-साथ सोशल मीडिया ट्रेंड भी खासा चर्चा में है। पिछले महाकुंभ में वायरल हुई मोनालिसा के बाद अब माला बेचने आईं बासमती और अफसाना नाम की दो युवतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गई हैं। बासमती की सादगी और कजरारी आंखें सोशल मीडिया यूजर्स को वीडियो बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं, जबकि अफसाना का कहना है कि लोग माला खरीदने से ज्यादा सेल्फी लेने में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे उनकी बिक्री पर असर पड़ रहा है।
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माघ मेले की आध्यात्मिकता को और गहराई देती है बिहार के सीतामढ़ी जिले के 26 वर्षीय साधु शंकरपुरी की अनोखी तपस्या। उनका दावा है कि वे पिछले सात वर्षों से न बैठे हैं और न लेटे हैं। एक पैर पर खड़े होकर साधना करने वाले शंकरपुरी सोते समय भी लकड़ी के सहारे सिर टिकाते हैं। उनका कहना है कि भोजन से लेकर पूजा-पाठ तक वे हर कार्य खड़े होकर ही करते हैं।
44 दिनों तक चलने वाला यह धार्मिक आयोजन 3 जनवरी से आरंभ होकर 15 फरवरी को संपन्न होगा, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं के संगम में पवित्र स्नान करने की संभावना है।
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