दुआओं में बहुत शक्ति होती है,
जो किसी के लिये भी की जाती है,
दुआ देना अहंकार नहीं होता है,
दुआ तो प्रभू से माँगना होता है।
दुनिया का मालिक है जनक हमारा
और हम सब उसकी ही संताने हैं,
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई तो हैं,
हम, पर आपस में तो भाई भाई हैं।
हम आपस में करते हैं लड़ाई जब,
दुनिया में क़यामत आती है तब,
उस दिन जो आफ़त आने वाली है,
ये सोच सोच रूह मेरी घबराई है।
किसी से प्रेम का सौदा न करो भाई,
जीवन में प्रेम नहीं मोल बिकाता है,
दुनिया में स्वार्थलिप्त जो प्यार करे,
इंसान वह कदम कदम दुःख पाता है।
प्रेम के बदले सोच लिया कुछ पाना,
इंसान मुख में कालिख पुतवाता है,
इस संसार में रहना नहिं देश विराना है,
कागद की पूड़ी, बूँद पड़े गलि जाना है।
चुप रहना भी कभी कभी अच्छा होता है,
ज़रूरत पर चुप्पी तोड़ना भी अच्छा है,
माफ़ी दे भी दे, माफ़ी माँग भी ले जो,
वही तो इंसान का बड़प्पन ही होता है।
काँटों की बाड़ी में उलझे तो फँस जाना है,
झाड़ व झाँखर में आग लगे जल जाना है,
आदित्य कहें इसमें क्यों उलझो साँई,
ध्यान करो प्रभु का अंत वहीं तो जाना है।
- डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’
