सरकार के कपास आयात निर्णय पर राजनीति गरमाई

केजरीवाल ने पीएम मोदी पर लगाया किसानों से विश्वासघात का आरोप

नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) केंद्र सरकार द्वारा कपड़ा व्यापारियों को राहत देते हुए शुल्क-मुक्त कपास आयात की समयसीमा 31 दिसंबर तक बढ़ाने के फैसले पर अब राजनीति तेज हो गई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस निर्णय को किसानों के साथ “विश्वासघात” करार दिया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला है।

सरकार के आदेश के मुताबिक, कपड़ा व्यापारी अब 31 दिसंबर 2025 तक अमेरिका से बिना आयात शुल्क चुकाए कपास ला सकते हैं। इससे पहले यह छूट 19 अगस्त से 30 सितंबर तक के लिए दी गई थी। केंद्र का तर्क है कि यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ के बोझ से भारतीय कपड़ा उद्योग को राहत देने के लिए उठाया गया है।

हालांकि, केजरीवाल ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि देश के 90-95% किसानों को यह तक पता नहीं है कि उनके साथ क्या हुआ है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका से आने वाला कपास भारतीय कपास की तुलना में 15-20 रुपये प्रति किलो सस्ता है, जिससे देश के कपास किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।

केजरीवाल ने कहा,

“यदि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है, तो हमें भी अमेरिका से आने वाले कपास पर 100% टैरिफ लगाना चाहिए। लेकिन मोदी सरकार उल्टा किसानों के हितों को नुकसान पहुंचा रही है।”

उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि कपास पर 11% आयात शुल्क हटाने के आदेश को तुरंत रद्द किया जाए और अमेरिका से आयातित कपास पर शुल्क बहाल किया जाए ताकि भारतीय किसानों को संरक्षण मिल सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि आयात शुल्क हटने से कपड़ा व्यापारियों और उद्योग को अल्पकालिक राहत जरूर मिलेगी, लेकिन दीर्घकाल में यह फैसला किसानों की आय पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। वहीं, विपक्ष ने इसे किसानों के साथ केंद्र सरकार का दोहरा रवैया करार दिया है।

Editor CP pandey

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