“यह मेरा नहीं, सलेमपुर की जनता के जनादेश का अपमान है” — रमाशंकर विद्यार्थी
देवरिया में खेल आयोजन बना राजनीतिक विवाद, संसद तक पहुंचेगा मामला
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जनपद देवरिया के भाटपाररानी स्थित मल्हना स्टेडियम में आयोजित सांसद खेल प्रतियोगिता अब खेल से अधिक राजनीति का अखाड़ा बनती नजर आ रही है। इस आयोजन को लेकर सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर विद्यार्थी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिस लोकसभा क्षेत्र में यह प्रतियोगिता आयोजित की गई, उसी क्षेत्र के निर्वाचित सांसद को जानबूझकर आमंत्रित नहीं किया गया, जो न केवल लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है बल्कि जनता के जनादेश का भी सीधा अपमान है।
सांसद रमाशंकर विद्यार्थी ने इस पूरे प्रकरण पर वीडियो संदेश जारी कर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी जनप्रतिनिधि का सम्मान जनता के फैसले से जुड़ा होता है। ऐसे में एक सरकारी और जनहित से जुड़े आयोजन में मौजूदा सांसद को नजरअंदाज करना सलेमपुर की जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि “यह मेरा नहीं, बल्कि सलेमपुर की जनता के जनादेश का अपमान है।”
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सांसद ने आरोप लगाया कि सांसद खेल प्रतियोगिता जैसे सकारात्मक उद्देश्य वाले कार्यक्रम को राजनीतिक द्वेष का शिकार बना दिया गया। प्रतियोगिता का मकसद युवाओं को खेलों से जोड़ना, खेल भावना को प्रोत्साहित करना और प्रतिभाओं को मंच देना है, लेकिन यहां इसे एक पार्टी विशेष के प्रचार कार्यक्रम की तरह प्रस्तुत किया गया। उन्होंने दावा किया कि आयोजन में भाजपा के पूर्व सांसदों और नेताओं को प्रमुखता से बुलाया गया, जबकि वर्तमान सांसद को न तो कोई औपचारिक आमंत्रण भेजा गया और न ही आयोजन की जानकारी दी गई।
रमाशंकर विद्यार्थी ने यह भी सवाल उठाया कि जब यह प्रतियोगिता क्रीड़ा विभाग द्वारा सरकारी संसाधनों और जनता के धन से आयोजित की गई, तो इसमें राजनीतिक भेदभाव कैसे किया जा सकता है। उन्होंने प्रशासनिक भूमिका पर भी सवाल खड़े करते हुए निष्पक्षता की मांग की।
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सांसद ने चेतावनी दी कि वह इस सांसद खेल प्रतियोगिता विवाद को संसद के पटल पर उठाएंगे और भारत सरकार से इसकी निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि सलेमपुर की स्वाभिमानी जनता सब देख रही है और लोकतांत्रिक तरीके से समय आने पर जवाब जरूर देगी।
इस बयान के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे लोकतंत्र का अपमान बता रहा है, वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी आयोजन की प्रक्रिया और आमंत्रण प्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
