मिर्जापुर–वाराणसी में चीनी मांझे का कहर: गले से लेकर आंख तक कटे, कई घायल, प्रशासन पर उठे सवाल
वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)मिर्जापुर और वाराणसी में मकर संक्रांति के दौरान पतंगबाजी लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक रहे चीनी मांझे ने कई परिवारों को दहशत में डाल दिया है। ताजा घटनाओं में बाइक सवार युवक का गला कट गया, बच्चों के चेहरे और हाथ जख्मी हुए और ड्यूटी पर जा रहे पुलिसकर्मी तक घायल हो गए।
मिर्जापुर के जमालपुर थाना क्षेत्र के मठना गांव निवासी विनोद पटेल (35) सुबह बाइक से वाराणसी से लौट रहे थे। रामनगर किले के पास अचानक चीनी मांझा उनके गले में उलझ गया। जब तक वह संभलते, धारदार मांझे से गला गहराई तक कट गया। लहूलुहान हालत में उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां नौ टांके लगाए गए।
इसी जिले के कौड़िया कला गांव में 10 वर्षीय सत्यम पतंग की रील पकड़ते समय मांझे से हाथ कटवा बैठा। वहीं देहात कोतवाली क्षेत्र के जसोवर गांव में छत पर पतंग उड़ा रहा 7 साल का अमन संतुलन बिगड़ने से नीचे गिर गया और घायल हो गया।
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चीवाराणसी में हालात और गंभीर दिखे। रामनगर, लोहता, लहरतारा, कज्जाकपुरा और सोनारपुरा इलाकों में कम से कम 15 लोग चीनी मांझे की चपेट में आए। लहरतारा में 6 साल के बच्चे के चेहरे पर 10 टांके लगे, जबकि जैतपुरा में डायल 112 से जा रहे पुलिसकर्मी की नाक कट गई।
इन घटनाओं के बाद सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अस्सी घाट पर छात्रों ने “मांझा हटाओ–जीवन बचाओ” अभियान चलाया, वहीं भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर चीनी मांझे की बिक्री पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी मांझा केवल इंसानों ही नहीं, पक्षियों और पशुओं के लिए भी घातक है।
