कविता दर्शन इस जीवन के
निज कृत कृत्य दिखाता है,
कविता दर्पण साहित्य सृजन
की महिमा मण्डन करवाता है।
मैं कविता रचकर अभिलाषा का,
हृदय श्रोत, कर शान्ति पिपासा का,
धड़कन हर धड़कन में घूम घूम कर,
उद्वैलित कल्पित मानस चूम चूम कर।
मानस के झँझावातो को झकझोर,
झोर कर, पाठक का मन मरोड़कर,
आदित्य मैं अपनी रचना पढ़वाता हूँ,
मन ही मन भाव विभोर हो जाता हूँ।
हुये नहीं हैं श्वेत रविकिरण तेज में,
सिर के ऊपर के ये केश कारे कारे,
संघर्ष किये हैं जीवन में कितने सारे,
तब प्राप्त हुये हैं अनुभव न्यारे न्यारे।
अनुभव जीवन का देता है सीख सुघड़,
शिकायतें कम एवं आभार अधिकतम
करने से ज़िंदगी आसान हो जाती है,
आपसी प्रेम की भावना बढ़ जाती है।
मानस की महिमा पढ़ने में मानस का
मित्र मेरा, मानस से दूर न होने पाये,
आदित्य चुनौती ये गढ़कर मनमानस
मेरा जनमानस पढ़कर आगे बढ़ जाये।
कर्नल आदि शंकर मिश्र, आदित्य
लखनऊ
24 सितंबर को मंगल का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश, इन 6 राशियों को रहना होगा…
यूपी में धान खरीद की तैयारी तेज, किसानों को मिलेगा ₹2,461 तक MSP; रजिस्ट्रेशन जरूरी…
मां का शव घर में पड़ा था, छह बेटियों में छिड़ा संपत्ति का संग्राम; पुलिस…
विस्फोटक की सूचना मिलते ही कोर्ट में मची अफरा-तफरी, सुरक्षा एजेंसियों ने संभाला मोर्चा मसौढ़ी/पटना…
AK-47 आरोप से MLC चुनाव तक गरमाई सियासत, अनंत सिंह और नीरज कुमार फिर आमने-सामने…
यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव की आहट, बीजेपी-सपा के बीच नए सियासी…