हे कविवर, आपसे क्या कहूँ,
आप कवि हृदय तो हैं ही,
शब्दों के जादूगर और एक़
अच्छे, सच्चे इंसान भी तो हैं।
आप में मौजूद देशकाल, इतिहास,
संस्कृति, समाज, राजनीति व,
मानवता की प्रामाणिक ज्ञान
प्राप्त करने की कला भी है ।
मानवीय व सामाजिक भावना
व्यक्त करने की अद्भुत सूझबूझ,
भी मौजूद है, हम आपको ऐसे
ही नहीं प्रिय कविवर मानते हैं ।
कविता रचना एवं कविता में
रस अलंकार व लय ताल भरना,
आपमें यह सारे गुण हैं और
तभी कहता हूँ कवि का गहना।
शब्दों के जादूगर, अच्छे इंसान,
ज्ञान प्राप्त करने की सूझबूझ,
मानवीय व सामाजिक भावना
भी व्यक्त करने की कला जूझ।
इतनी सारी प्रशंसा का पात्र यदि
कोई कलाकार कवि हो तो,
कवि भूषण ! तब तो पद्म पुरस्कार
की माँग आपके लिये जायज़ है !
•कर्नल आदि शंकर मिश्र, आदिय
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