संसद परिसर में विपक्ष का विरोध प्रदर्शन, लोकतंत्र पर ‘एसआईआर’ से हमला बताकर सरकार को घेरा

नई दिल्ली, (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)
सोमवार को संसद के मानसून सत्र के दौरान इंडिया ब्लॉक के शीर्ष नेताओं ने मकर द्वार के बाहर एकजुट होकर विवादास्पद विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव सहित प्रमुख विपक्षी नेताओं ने इस प्रदर्शन में भाग लिया।

प्रदर्शन के दौरान नेताओं के हाथों में “लोकतंत्र पर वार” लिखे बैनर और “STOP SIR” (एसआईआर बंद करो) की तख्तियां दिखाई दीं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण का यह कदम भारतीय लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार है और इससे चुनावी पारदर्शिता तथा निष्पक्षता को खतरा है।

सरकार पर गंभीर आरोप
नेताओं ने एक स्वर में कहा कि सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “एसआईआर के नाम पर मतदाता सूची में बदलाव की जो प्रक्रिया चलाई जा रही है, वह संदेहास्पद है और इसका उद्देश्य विपक्ष के समर्थक मतदाताओं को बाहर करना प्रतीत होता है।”

वहीं राहुल गांधी ने कहा, “सरकार लोकतंत्र को व्यवस्थित ढंग से खत्म कर रही है। यह सिर्फ मतदाता सूची का मुद्दा नहीं, बल्कि लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश है।” सोनिया गांधी ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए विपक्ष एकजुट है और सरकार की हर ‘तानाशाही’ नीति का विरोध करता रहेगा।

अखिलेश यादव का बयान
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा, “भारत के लोकतंत्र को सबसे बड़ा खतरा अंदर से ही है। सरकार सत्ता में बने रहने के लिए वोटर लिस्ट से छेड़छाड़ कर रही है, जिसे देश का कोई नागरिक बर्दाश्त नहीं करेगा।”

विपक्ष की मांग
विपक्षी दलों की प्रमुख मांग है कि विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए और इसकी निष्पक्षता की न्यायिक जांच हो। साथ ही, निर्वाचन आयोग से स्वतंत्र और पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

एकजुट विपक्ष का संदेश
संसद के मकर द्वार पर यह प्रदर्शन विपक्ष की एकता का प्रतीक भी बना। कांग्रेस, सपा, डीएमके, टीएमसी, आम आदमी पार्टी, और अन्य सहयोगी दलों के नेताओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए वे संसद से सड़क तक संघर्ष करेंगे।
इस प्रदर्शन के माध्यम से इंडिया ब्लॉक ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि 2024 के आम चुनाव से पहले किसी भी प्रकार की वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ या लोकतंत्र विरोधी कदम को वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। संसद भवन के बाहर यह विरोध अब आने वाले समय में एक बड़े राजनीतिक आंदोलन का संकेत भी बन सकता है।

फोटो सौजन्य से एएनआई

Editor CP pandey

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