नूतन वर्ष मनाएंगे
साल नया और हाल पुराना
कुछ सुनना कुछ उन्हें सुनाना
कुछ पाया कुछ खोया सबने
जैसा था अपनाया हमने
शिकवे और गिले थे सारे
उनमें भी सब रहे हमारे
जद्दोजहद रही रोटी की
बात वही किस्मत खोटी की
रीति प्रीति है बदली-बदली
रिश्तों में अब अदलाबदली
हानि लाभ हावी रिश्तों पर
खुद का स्वार्थ आज है ऊपर
प्रेम समर्पण त्याग पुराना
बदल गया सब ताना-बाना
किस कंधे पर सिर रख रोऊं
वो मेरा मैं उसका होऊं
कहाँ गए खुशियों के आंसू
जिनके संग सुख-दुःख मैं बांटू
कहाँ गई यादों की हिचकी
आती है अब अक्सर सिसकी
नए साल में अरमानों के
बीज नया हम फिर बोयेंगे
आस और विश्वास लिए हम
मधुर स्वप्न में फिर खोंयेंगे
दोहराएंगे वही कहावत
गिरती चढ़ती चींटी का
नया हौंसला फिर लेकर हम
नूतन वर्ष मनाएंगे..।।
नूतन वर्ष मनाएंगे..।।
~ विजय कनौजिया
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