नवरात्रि 2025: माँ कालरात्रि की पूजा-अर्चना, भक्तों ने किया सातवें स्वरूप का अभिनंदन

बघौचघाट/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। शारदीय नवरात्रि 2025 के सप्तमी तिथि पर क्षेत्रवासियों ने माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा-अर्चना व उपासना बड़े श्रद्धा भाव से की। पथरदेवा क्षेत्र समेत बघौचघाट में रविवार को मंदिरों और पूजा पंडालों में भक्तों ने माता के जयकारों के साथ उनका स्मरण किया।

माँ कालरात्रि का स्वरूप और महत्व

माँ दुर्गा की यह सातवीं शक्ति कालरात्रि के नाम से जानी जाती है। इनका रूप भयानक होते हुए भी अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। माँ का शरीर घने अंधकार के समान काला है। बिखरे हुए केश और गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला है। तीन नेत्र ब्रह्मांड के समान गोल हैं और सांसों से अग्नि निकलती रहती है।इनकी सवारी गर्दभ (गधा) है।

माँ कालरात्रि दानव, दैत्य, राक्षस और भूत-प्रेत का नाश करती हैं। भक्तों की रक्षा कर उन्हें निर्भय बनाती हैं। यही कारण है कि इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।

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भक्तों को मिलता है वरदान

माँ कालरात्रि के दाहिने हाथ की वर मुद्रा भक्तों को आशीर्वाद देती है और अभय मुद्रा में भक्त निडर रहते हैं। उनके बाएं हाथ में लोहे का कांटा और खड्ग है, जो बुराई के नाश का प्रतीक है।
मान्यता है कि माँ कालरात्रि की उपासना करने से ग्रह बाधाएं, शत्रु भय, रात्रि भय, अग्नि और जल से संबंधित संकट दूर हो जाते हैं।

क्षेत्र में आयोजित हुआ विशेष पूजन

इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
उपासना में प्रधान संघ अध्यक्ष मुरारी मोहन शाही, थानाध्यक्ष विशाल उपाध्याय, तरकुलवा थानाध्यक्ष मृत्युंजय राय, राजू श्रीवास्तव, पूर्व प्रधान कुंवर राय, मंडल अध्यक्ष जिप्पू शाही, महिवाल जायसवाल, जेई नितेश कुमार, धर्मवीर गुप्ता, सतीश मणि, रंजन श्रीवास्तव समेत अनेक श्रद्धालु शामिल हुए।

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Karan Pandey

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