मऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिजली विभाग की एक कथित विभागीय गलती ने उपभोक्ता को वर्षों तक परेशान किया। एक ही परिसर में एक व्यक्ति के नाम पर दो घरेलू बिजली कनेक्शन जारी कर दिए गए, जबकि उपभोक्ता इस्तेमाल केवल एक कनेक्शन का कर रहा था। इसके बावजूद दोनों कनेक्शनों के बिल भेजे जाते रहे। शिकायतों और विभागीय जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद भी सुधार नहीं हुआ। आखिरकार मामला स्थायी लोक अदालत पहुंचा, जहां न्यायपीठ ने विद्युत विभाग पर 50 हजार रुपये की मानसिक क्षतिपूर्ति का आदेश सुनाया। इतना ही नहीं, दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन से क्षतिपूर्ति की रकम वसूलने का निर्देश भी दिया।
एक और ऐसा ही कार्य हुआ गरीब परिवार के साथ नीचे के आवेदन से स्पष्ट हो जाएगा बस गरीब परिवार 2 सालों से लगा रहा है अधिकारीयो का चक्कर इसी प्रकरण में मानसिक क्षति के कारण विमारी ने ले ली जान?
पिढ़वल ही निवासी महेश्वरी मिश्र के नाम से एक कनेक्शन पूर्व में था पर विभागीय लापरवाही कहे या दलालो का खेल पुनः 2019 में पुरषोत्तम मिश्र पुत्र महेश्वरी के नाम एक नया कनेक्शन दे दलालों के साथ स्थानीय अधिकारियों द्वारा धनउगाही का मामला बना नहीं दे रहे गरीब परिवार को राहत
1997 में लिया कनेक्शन, विभागीय गलती ने बढ़ाई परेशानी
मामला घोसी थाना क्षेत्र के लाखीपुर पीढ़वल गांव निवासी बीरबल मौर्य पुत्र जंगई मौर्य से जुड़ा है। बीरबल मौर्य ने घरेलू उपयोग के लिए 10 फरवरी 1997 को एक किलोवाट बिजली कनेक्शन का आवेदन किया था। आरोप के मुताबिक, विभागीय त्रुटि के कारण उनके नाम पर एक ही परिसर में दो घरेलू कनेक्शन जारी हो गए, जबकि इस्तेमाल केवल एक का हो रहा था। जब उपभोक्ता को इस गड़बड़ी की जानकारी हुई तो उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कई बार मौखिक और लिखित शिकायत की। विभागीय जांच में भी गलती स्वीकार किए जाने के बावजूद दूसरा कनेक्शन बंद नहीं किया गया। नतीजतन, बिल भेजने का सिलसिला जारी रहा।
शिकायतों के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था, 2023 में जारी हुई आरसी
मामले में सबसे गंभीर मोड़ वर्ष 2023 में आया, जब कथित बकाया बिजली बिल के आधार पर उपभोक्ता के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी कर दिया गया। जिस गड़बड़ी को सुधारने की जिम्मेदारी विभाग की थी, उसी के चलते उपभोक्ता पर भुगतान का दबाव बनने लगा। लगातार परेशानियों से जूझने के बाद बीरबल मौर्य ने न्याय की गुहार लगाते हुए स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाया।
सुलह नहीं हुई तो साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई अध्यक्ष हीरा लाल तथा न्यायपीठ के सदस्य विकास भाई निकुम्भ और सदस्या स्नेहलता की पीठ ने की। शुरुआत में सुलह-समझौते के जरिए विवाद सुलझाने का प्रयास किया गया, लेकिन समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद न्यायपीठ ने उपलब्ध साक्ष्यों और विभागीय जांच के तथ्यों के आधार पर मामले का गुण-दोष के अनुसार परीक्षण किया।
न्यायपीठ ने पाया कि विभागीय गलती के कारण उपभोक्ता को अनावश्यक रूप से दो कनेक्शनों के बिल भेजे जाते रहे। शिकायतों और जांच के बावजूद सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई और वर्ष 2023 में आरसी जारी कर भुगतान का दबाव बनाया गया। इसे गंभीर विभागीय लापरवाही और मानसिक प्रताड़ना का मामला मानते हुए पीठ ने विद्युत विभाग को उपभोक्ता के प्रार्थना पत्र देने की तिथि से एक माह के भीतर 50 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित चेक से भुगतान करने का निर्देश दिया। निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर ब्याज की दर आठ प्रतिशत वार्षिक होगी।
दोषियों की जेब से होगी भरपाई!
न्यायपीठ ने अधीक्षण अभियंता को आंतरिक जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान करने तथा नियमानुसार उनके वेतन से क्षतिपूर्ति की रकम वसूलकर विभागीय खाते में जमा कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया।
इस फैसले से सरकारी विभागों के लिए स्पष्ट संदेश है कि उनकी गलती का खामियाजा आम नागरिक को नहीं भुगतना चाहिए। शिकायतों का समय पर निस्तारण और गलतियों में सुधार विभागों की जिम्मेदारी है। वहीं, उपभोक्ताओं के लिए भी यह मामला बताता है कि विभागीय उत्पीड़न के खिलाफ उचित कानूनी मंच पर आवाज उठाकर न्याय की लड़ाई लड़ी जा सकती है।
राष्ट्र की परम्परा की विशेष प्रस्तुति: बिजली बिल की गड़बड़ी से लेकर आरसी जारी होने तक के इस मामले में अब विभागीय जवाबदेही तय करने की चुनौती है।
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