वह चराचर जगत के स्वामी हैं,
सारा संसार उन्हीं पर आश्रित है,
वह देवों के देव हैं, महानतम हैं,
शक्तिशालियों में शक्तिशाली हैं।
ऐसे जगत के स्वामी ईश्वर को
अंतःकरण में ग्रहण करना चाहिये,
सबके पालनहार सुख दुख के प्रभू
मन – मंदिर में बसे रहना चाहिये।
मूर्ति कार गरीब कलाकार के लिए
भगवान बिकते हैं ख़ुद बाज़ारों में,
गरीब खा सकें दो बार दिन भर में,
बच्चे पाल पोष सकें अपने जीवन में।
ज्यादा कुछ नहीं बदल पाता है,
धन दौलत यश अपयश के साथ,
बचपन की जिद बदलती है जीवन
भर दुनिया के समझौतों के साथ।
मानव जीवन प्रकृति के संग चले,
जितना हो, प्रकृति की सुरक्षा करें,
आदित्य जल,ऊर्जा,पर्यावरण की,
प्रकृति से दोहन बिलकुल नहीं करें।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
श्रीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में बड़ा हादसा सामने आया है। यहां…
IND vs SA: टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लीग स्टेज में चारों मैच जीतकर सुपर-8…
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। राजधानी के भारत मंडपम में शुक्रवार (20 फरवरी) को आयोजित…
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। राजधानी लखनऊ के प्रख्यात साहित्यकार, कवि, लेखक एवं सेना से सेवानिवृत्त…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर तहसील मेहदावल में…
आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय प्रशासनिक न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर ने राजकीय…