आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के माननीय प्रशासनिक न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर ने राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर), आगरा का विस्तृत औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य गृह में रह रहे किशोरों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा और उनके समग्र विकास व पुनर्वास की दिशा में आवश्यक निर्देश देना था।
150 क्षमता, 131 किशोर आवासित
150 की निर्धारित क्षमता वाले इस गृह में वर्तमान में 131 किशोर रह रहे हैं। निरीक्षण के दौरान न्यायमूर्ति ने:
• आवासीय व्यवस्था
• स्वच्छता
• भोजन की गुणवत्ता
• स्वास्थ्य सेवाएं
• सुरक्षा प्रबंध
का गहन निरीक्षण किया।
उन्होंने किशोरों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और लंबित मामलों की जानकारी भी ली।
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समयबद्ध विधिक सहायता के निर्देश
न्यायमूर्ति ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक किशोर को समयबद्ध विधिक सहायता उपलब्ध कराई जाए और उनके मामलों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किशोर न्याय व्यवस्था का उद्देश्य दंड नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभाओं का सम्मान
निरीक्षण के अवसर पर आयोजित गीत, योग, नृत्य और पेंटिंग प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किशोरों को ट्रॉफी देकर सम्मानित किया गया। न्यायमूर्ति ने रचनात्मक गतिविधियों को सकारात्मक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बताया।
वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित
इस दौरान जनपद न्यायाधीश, जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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