Saturday, February 28, 2026
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मकर संक्रांति: छतों से आसमान तक उत्सव की उड़ान

मकर संक्रांति 2026: लखनऊ और उत्तर प्रदेश में पतंगों के संग परंपरा, उत्सव और ज़िम्मेदारी का संदेश


(राष्ट्र की परम्परा धर्म डेस्क)मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जो सिर्फ़ पंचांग की एक तिथि नहीं बल्कि मौसम, समाज और जीवनशैली में आने वाले सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश, विशेषकर लखनऊ में मकर संक्रांति का उत्सव पारंपरिक श्रद्धा, सामाजिक मेलजोल और पतंगबाजी की रंगीन परंपरा के साथ मनाया जाता है। जैसे ही सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर बढ़ता है, वैसे ही लोगों के जीवन में नई ऊर्जा, उम्मीद और उत्साह का संचार होता है।
लखनऊ की छतों से लेकर गांवों के खुले मैदानों तक, मकर संक्रांति के दिन आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। यह दृश्य न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि सामाजिक एकता, लोकसंस्कृति और पीढ़ियों को जोड़ने वाला उत्सव भी है।

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लखनऊ और उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति की परंपरा
उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति को अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं इसे खिचड़ी पर्व कहा जाता है तो कहीं यह दान-पुण्य और स्नान का विशेष दिन माना जाता है। लखनऊ में यह पर्व गंगा-जमुनी तहज़ीब का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करता है।
सुबह से ही लोग पवित्र नदियों में स्नान कर दान करते हैं, तिल, गुड़, चावल और खिचड़ी का सेवन किया जाता है। इसके बाद दोपहर से लेकर शाम तक पतंग उड़ाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। पुराने लखनऊ की गलियों, चौक, अमीनाबाद, आलमबाग और गोमतीनगर जैसे इलाकों में पतंगबाजी एक सामूहिक उत्सव का रूप ले लेती है।
पतंगबाजी: खेल, संस्कृति और सामाजिक जुड़ाव

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पतंग उड़ाना केवल एक खेल नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद का माध्यम भी है। मकर संक्रांति के दिन छतों पर खड़े लोग एक-दूसरे से अनजान होते हुए भी “वो काटा… वो मारा” की आवाज़ पर जुड़ जाते हैं। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुज़ुर्ग—सभी इस उत्सव में अपनी भूमिका निभाते हैं।
लखनऊ और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सामूहिक पतंग उत्सव आयोजित किए जाते हैं, जिनमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकगीत और पारंपरिक व्यंजन भी शामिल होते हैं। यह आयोजन आधुनिक जीवन में कम होते जा रहे सामाजिक मेलजोल को फिर से जीवित करते हैं।
स्वास्थ्य और मानसिक सुकून से जुड़ा पर्व

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मकर संक्रांति के दौरान पतंग उड़ाना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है। खुले आसमान में रहने से शरीर को सूर्य की रोशनी मिलती है, जिससे विटामिन-डी का स्तर बढ़ता है। हाथ, कंधे और आंखों की सक्रियता से हल्का व्यायाम भी हो जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से पतंगबाजी तनाव कम करने और मन को प्रसन्न रखने में सहायक है। रंग-बिरंगी पतंगों को उड़ते देखना एक तरह का ध्यान अनुभव कराता है, जो वर्तमान क्षण में जीने की सीख देता है। बच्चों के लिए यह गतिविधि धैर्य, संतुलन और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में सहायक होती है।

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सुरक्षा और पर्यावरण: ज़िम्मेदारी की ज़रूरत
हालांकि पतंगबाजी उत्सव का प्रतीक है, लेकिन इससे जुड़े सुरक्षा और पर्यावरणीय मुद्दों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उत्तर प्रदेश में कई बार चीनी मांझे और नायलॉन डोर के कारण गंभीर दुर्घटनाएं सामने आई हैं। यह इंसानों के साथ-साथ पक्षियों और जानवरों के लिए भी जानलेवा साबित हुआ है।
लखनऊ प्रशासन और राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंध और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन ज़िम्मेदारी समाज के हर व्यक्ति की है। सूती धागे का इस्तेमाल, खुले मैदानों में पतंग उड़ाना, बच्चों की निगरानी और सड़क के पास पतंग न उड़ाना जैसे उपाय अपनाकर हादसों से बचा जा सकता है।

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पर्यावरण की दृष्टि से भी इको-फ्रेंडली पतंगों और प्राकृतिक रंगों का उपयोग समय की मांग है। प्लास्टिक और नायलॉन से बनी पतंगें लंबे समय तक नष्ट नहीं होतीं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती हैं। लखनऊ के कई सामाजिक संगठन और स्कूल इस दिशा में जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
आधुनिक दौर में बदलती पतंग परंपरा
डिजिटल युग में मकर संक्रांति और पतंग उत्सव ने वैश्विक पहचान बना ली है। सोशल मीडिया पर लखनऊ और उत्तर प्रदेश के पतंग उत्सवों की तस्वीरें और वीडियो देश-विदेश तक पहुंचते हैं। विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय भी इस दिन पतंग उड़ाकर अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं।
यह बदलाव दर्शाता है कि परंपराएं समय के साथ बदलती हैं, लेकिन उनका मूल संदेश—सामूहिकता, संतुलन और खुशी—अटल रहता है।

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निष्कर्ष
मकर संक्रांति और पतंगबाजी लखनऊ और उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि खुशी और ज़िम्मेदारी एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। जब परंपरा को समझदारी और संवेदनशीलता के साथ निभाया जाता है, तो यह न केवल अतीत से जोड़ती है, बल्कि भविष्य के लिए भी प्रेरणा देती है।
आसमान में उड़ती पतंगें हमें यह संदेश देती हैं कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती—ज़रूरत है तो बस संतुलन और सही दिशा की।

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