महुआ मोइत्रा की सुप्रीम कोर्ट में याचिका: बिहार में वोटर लिस्ट की जांच पर उठाए सवाल

नई दिल्ली / पटना, ( राष्ट्र की परम्परा डेस्क) पश्चिम बंगाल की सांसद और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की तेजतर्रार नेता महुआ मोइत्रा ने बिहार में मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) की विशेष जांच के चुनाव आयोग के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। महुआ मोइत्रा का आरोप है कि यह आदेश न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि इससे लाखों लोगों का मतदान का अधिकार खतरे में पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मोइत्रा ने कहा है कि बिहार में चुनाव आयोग द्वारा विशेष रूप से “संदिग्ध” मतदाताओं की पहचान कर उनके नाम हटाने की प्रक्रिया भेदभावपूर्ण और असमान है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित हो सकती है, जिसका उद्देश्य कुछ खास समुदायों और वर्गों के मतदाताओं को मतदान से वंचित करना हो सकता है।

क्या है मामला?

चुनाव आयोग ने हाल ही में एक आदेश जारी कर बिहार में मतदाता सूचियों की विशेष जांच करने का निर्देश दिया है। इसके तहत संदिग्ध, डुप्लिकेट, और फर्जी मतदाताओं की पहचान कर उनके नाम सूची से हटाने की प्रक्रिया की जा रही है। आयोग का कहना है कि यह पहल पारदर्शिता और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है।

हालांकि, महुआ मोइत्रा का कहना है कि इस आदेश का कोई वैधानिक आधार नहीं है और यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन करता है।

महुआ मोइत्रा का पक्ष

सांसद मोइत्रा ने अपनी याचिका में लिखा है,

“मतदाता सूची की इस तरह की असामान्य और भेदभावपूर्ण जांच से गरीब, वंचित, अल्पसंख्यक और प्रवासी मजदूर सबसे अधिक प्रभावित होंगे। जिनके पास पहले से ही पहचान से जुड़े सीमित दस्तावेज हैं, उनके नाम हटने का खतरा ज्यादा है। यह लोकतंत्र की जड़ों पर सीधा हमला है।”

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्यों सिर्फ बिहार को इस तरह की जांच के लिए चुना गया, जबकि अन्य राज्यों में कोई ऐसी पहल नहीं की गई।

चुनाव आयोग का पक्ष

हालांकि चुनाव आयोग की ओर से अभी तक सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, आयोग पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि उसकी यह पहल किसी भी तरह से भेदभावपूर्ण नहीं है और इसका उद्देश्य केवल निष्पक्ष चुनाव कराना है।

अगली सुनवाई कब?

सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर आने वाले सप्ताह में सुनवाई कर सकता है। इस मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है, और यह देखा जा रहा है कि क्या यह मामला आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव या लोकसभा चुनाव पर कोई प्रभाव डालेगा।

Editor CP pandey

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