पगड़ी उछल रही थी,
दहेज और गरीबी
बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
डोली थी उठने वाली.
बेटी सिसक रही थी.
पिता को रोने पर मजबूर कर दिया,
पगड़ी उछल रही थी,
डोली थी उठने वाली.
टीना टीना युगल,
पाई पाई बचाओ,
अपने से ऊँचे घर में,
बेटी को अपनी बेटी,
डोली थी उठने वाली.
पर्याप्त से अधिक,
अपनी बेटी को अपना बनाओ,
दुखी होकर चला गया था,
ताना सुन रहा था,
डोली थी उठने वाली.
घुट घुट के जो रह रहा था
पुच था,
हिंसा का तूफ़ान,
यह बढ़ता जा रहा था.
डोली थी उतने वाली
बेटी सिसक रही थी.
सीमा त्रिपाठी
लेखक: अभिषेक कुमार 4 नवंबर का इतिहास: जन्मदिन विशेषइतिहास सिर्फ बीते हुए कल का लेखा-जोखा…
पैराशूट और दिशा नियंत्रण ने बढ़ाई विशेषज्ञों की चिंता! इन-स्पेस नारायणी रॉकेट्री कप 2026 में…
AI निर्मित 4 नवंबर 2026 का दैनिक पंचांगदिन: बुधवार | विक्रम संवत: 2083 | शक…
मेल, पार्सल और इंटरनेशनल डाक के नेटवर्क को मजबूत करने की बड़ी पहल, अहमदाबाद से…
व्यंग्य: खुश करना नहीं, पुश करना जरूरी! चयनकर्ताओं के फैसले, खिलाड़ियों का प्रदर्शन और आलोचनाओं…
डिजिटल अर्थव्यवस्था में बढ़ते रोजगार के बीच श्रमिकों को बीमा, स्वास्थ्य सुविधा, मातृत्व लाभ और…