लखनऊ(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) गोमती नगर विस्तार में जमीन बिक्री से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट कहा कि सात-सात अधिकारियों द्वारा जांच किए जाने के बावजूद भी प्राधिकरण ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। अदालत ने इस निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए मामले की गंभीरता को देखते हुए पिछले 10 वर्षों की सभी संपत्ति बिक्री का ऑडिट कराने का आदेश दिया है।
याचिका अधिवक्ता शरद पाठक की ओर से दायर की गई थी, जिसमें गोमती नगर विस्तार योजना के तहत जमीनों की बिक्री में अनियमितताओं और फर्जीवाड़े का मुद्दा उठाया गया था। अदालत ने इस पर सुनवाई करते हुए बहुजन निर्बल वर्ग समिति को भी जांच का आदेश दिया है, ताकि प्रभावित वर्गों के हितों की सुरक्षा हो सके।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि जब सात अलग-अलग अफसरों ने जांच की और उसमें गड़बड़ियों की पुष्टि हुई, तो फिर कार्रवाई न होना प्राधिकरण की लापरवाही और मिलीभगत को दर्शाता है। अदालत ने कहा कि इस तरह की उदासीनता से जनता का भरोसा विकास प्राधिकरण जैसे संस्थानों पर से उठता है।
अदालत के आदेश के बाद अब एलडीए के लिए यह मामला गंभीर चुनौती बन गया है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि 10 वर्षों की संपत्ति बिक्री का ऑडिट रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
यह मामला अब न केवल गोमती नगर विस्तार की संपत्ति बिक्री बल्कि पूरे एलडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता दिखाई दे रहा है।
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