गर्भवती महिलाओं को प्रसव की सुविधाओं का अभाव, सीएचसी पर बढ़ी भीड़

उतरौला/बलरामपुर (राष्ट्र की परम्परा)। उतरौला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) क्षेत्र में प्रसव सेवाओं की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है। क्षेत्र की आधे से अधिक ग्राम पंचायतों में गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिसके चलते सीएचसी उतरौला पर गर्भवती महिलाओं का अत्यधिक दबाव बना हुआ है। शुक्रवार को सीएचसी पर मरीजों की भारी भीड़ देखी गई, जिसमें 500 से अधिक ओपीडी केस दर्ज किए गए। इस स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शासन को कोई ठोस कदम उठाने के लिए पत्राचार में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। क्षेत्र के भैरमपुर, बकसरिया, गुरदयाल डीह, जाफराबाद, जनुका जनुकी, मधपुर, मानापार बहेरिया, मोहनोत, पेहर, रमवापुर खुर्द और तेन्दुवा तकिया जैसी ग्राम पंचायतों में उपस्वास्थ्य केंद्र तो स्थापित किए गए हैं, लेकिन इनमें प्रसव की कोई सुविधा नहीं है। इन 11 उपस्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत चार-चार ग्राम पंचायतें आती हैं, जिससे इन केंद्रों पर भारी जनसंख्या निर्भर है। प्रसव सेवाओं की कमी के कारण इन पंचायतों की महिलाओं को प्रसव के लिए तहसील मुख्यालय या जिला अस्पताल की ओर रुख करना पड़ता है। सरकार द्वारा कुछ केंद्रों पर प्रसव सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन क्षेत्र के अधिकांश केंद्र इस सुविधा से वंचित हैं, जिससे बड़ी संख्या में महिलाओं को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। लोकतंत्र सेनानी चौधरी इरशाद अहमद गद्दी ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजा है, जिसमें सीएचसी उतरौला के सभी उपस्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इस संबंध में सीएचसी उतरौला के अधीक्षक, डॉ. सी.पी. सिंह ने बताया कि 11 उपस्वास्थ्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं के प्रसव के लिए शासन द्वारा अभी तक कोई स्वीकृति नहीं मिली है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही शासन से स्वीकृति प्राप्त होगी, इन केंद्रों पर प्रसव सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे क्षेत्र की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
उतरौला क्षेत्र में प्रसव सेवाओं की कमी गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन रही है। महिलाओं को सुरक्षित और सुलभ प्रसव सेवाएं दिलाने के लिए स्थानीय प्रशासन और शासन को जल्द से जल्द प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। इससे न केवल महिलाओं को राहत मिलेगी, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की समग्र गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

Karan Pandey

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