परोपकार होता रहे

आँख में यदि कुछ चला जाये तो
उसे बिलकुल नहीं देख पाती हैं,
वैसे ही दूसरे की बुराई दिखती है,
पर अपनी बुराई न दिख पाती है।

जीवन में वक्त से ज्यादा महंगी
अंतर्मन की भावनायें होती हैं,
यदि हृदय से इन्हें समझ सकें,
तो भावनायें अनमोल होती हैं।

कोई क्यों रूठता है अपनो से,
अपने सदा स्नेहशील होते हैं,
अपनों से मित्र कहाँ मिलते हैं,
जैसे मित्र आप हैं और हम हैं।

जिंदगी की राह कभी बनी बनाई
नही मिलती है, बनानी पड़ती है,
जिसने जैसा मार्ग बनाया होता है,
उसे वैसी ही मंजिल भी मिलती है।

हाथों से परोपकार होता रहे,
आँखों में प्रेम भाव झलकता रहे,
पैरों की गति सच की राह पे चले,
आदित्य जीवन प्रशस्त होता रहे।

डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’

rkpnews@desk

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