नई दिल्ली(राष्ट्र की परम्परा)
ज्यूडिशियल काउंसिल ने वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में की गई भारी वृद्धि की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे अनुचित, असंवेदनशील और छोटे व्यवसायों तथा आम नागरिक की आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत हानिकारक बताया है।
अपने आधिकारिक वक्तव्य में ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन राजीव अग्निहोत्री ने कीमतों में मनमानी बढ़ोतरी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस निर्णय ने छोटे और मध्यम उद्यमों पर असहनीय वित्तीय बोझ डाल दिया है। इसमें रेहड़ी-पटरी वाले, ढाबा संचालक, रेस्टोरेंट और अनेक सेवा प्रदाता शामिल हैं, जो अपने दैनिक कार्यों के लिए एलपीजी पर अत्यधिक निर्भर हैं। ज्यूडिशियल काउंसिल ने जोर देकर कहा कि ये क्षेत्र जमीनी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और पहले से ही बढ़ती लागत और घटते मुनाफे से जूझ रहे हैं।
राजीव अग्निहोत्री ने कहा, कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में अचानक और भारी वृद्धि मात्र एक नीतिगत निर्णय नहीं है—यह करोड़ों लोगों की आजीविका पर सीधा आघात है। ऐसे समय में जब व्यवसाय खुद को संभालने और बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं, आम नागरिकों पर बढ़ी कीमत थोपना उचित नहीं है।”
ज्यूडिशियल काउंसिल ने आगे चेतावनी दी कि इस मूल्य वृद्धि का व्यापक प्रभाव वस्तुओं और सेवाओं की लागत में वृद्धि के रूप में सामने आएगा, जिससे महंगाई बढ़ेगी और आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। काउंसिल के अनुसार, इस वृद्धि को लागू करने से पहले पर्याप्त सुरक्षा उपाय, राहत प्रावधान या हितधारकों से परामर्श का अभाव निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
इस कदम को “आर्थिक रूप से विघटनकारी और सामाजिक रूप से असंवेदनशील” बताते हुए ज्यूडिशियल काउंसिल ने कहा कि सभी नीतिगत निर्णयों में जनकल्याण सर्वोपरि होना चाहिए। काउंसिल ने यह भी रेखांकित किया कि जो भी कदम छोटे उद्यमियों और दैनिक मजदूरी करने वालों को असमान रूप से प्रभावित करता है, वह समावेशी विकास और आर्थिक न्याय के व्यापक उद्देश्य को कमजोर करता है।
इन चिंताओं के मद्देनज़र, ज्यूडिशियल काउंसिल ने कमर्शियल सिलेंडर की बढ़ी हुई कीमतों को तत्काल और बिना शर्त वापस लेने की सख्त मांग की है। साथ ही, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से पारदर्शी, न्यायसंगत और स्थिर मूल्य निर्धारण प्रणाली लागू करने का आह्वान किया है, जिससे छोटे व्यवसायों को ईंधन लागत में बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिल सके।
अग्निहोत्री ने कहा वर्तमान स्थिति असहनीय है। यदि तुरंत सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो इससे व्यापक आर्थिक संकट, व्यवसायों का बंद होना और बड़े पैमाने पर आजीविका का नुकसान होगा।
ज्यूडिशियल काउंसिल ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री से बिना विलंब हस्तक्षेप करने और राष्ट्रहित में निर्णायक कदम उठाने का आग्रह किया है। काउंसिल ने दोहराया कि शासन व्यवस्था को जवाबदेह, संवेदनशील और जनता की आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए, विशेषकर उन लोगों के लिए जो अर्थव्यवस्था के हाशिये पर हैं।
अपने वक्तव्य के समापन में, ज्यूडिशियल काउंसिल ने आशा व्यक्त की कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर तत्परता और जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई करेगी तथा एलपीजी जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वहनीयता, स्थिरता और जनविश्वास को बहाल करेगी।
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