समूचे देश को एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य करती है पत्रकारिता – राजू प्रसाद

बघौचघाट/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)वर्तमान में मीडिया बहुत ही सशक्त,स्वतंत्र और प्रभावकारी हो गया है। पत्रकारिता के दायित्वों के महत्व को देखते हुए समाज ने ही यह दर्जा दिया है।राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी राजू प्रसाद श्रीवास्तव ने क्षेत्रीय पत्रकार एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमल पटेल से उक्त बाते कही। उन्होंने कहा कि सामाजिक सरोकारों एवं सार्वजनिक हित से जुड़कर ही पत्रकारिता सार्थक बनती है। सामाजिक सरोकारों को व्यवस्था की दहलीज तक पहुँचाने और प्रशासन की जनहितकारी नीतियों व योजनाओ को समाज के सबसे निचले तबके तक ले जाने के दायित्व का निर्वाह ही सार्थक पत्रकारिता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को लोकतन्त्र का चौथा स्तम्भ भी कहा जाता है। पत्रकारिता ने लोकतन्त्र में यह महत्त्वपूर्ण स्थान अपने आप नहीं प्राप्त किया है बल्कि सामाजिक सरोकारों के प्रति पत्रकारिता के दायित्वों के महत्त्व को देखते हुए समाज ने ही दर्जा दिया है। कोई भी लोकतन्त्र तभी सशक्त है जब पत्रकारिता सामाजिक सरोकारों के प्रति अपनी सार्थक भूमिका निभाती है।सार्थक पत्रकारिता का उद्देश्य प्रशासन और समाज के बीच एक महत्त्वपूर्ण कड़ी की भूमिका अपनाये। पत्रकारिता के इतिहास पर नजर डाले तो स्वतन्त्रता के पूर्व पत्रकारिता का मुख्य उद्देश्य स्वतन्त्रता प्राप्ति का लक्ष्य था। स्वतन्त्रता के लिए चले आंदोलन और स्वाधीनता संग्राम में पत्रकारिता ने अहम और सार्थक भूमिका निभाई। उस दौर में पत्रकारिता ने पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोने के साथ-साथ पूरे समाज को स्वाधीनता की प्राप्ति के लक्ष्य से जोड़े रखा। आगे कहा कि इण्टरनेट और सूचना के आधिकार ने वर्तमान पत्रकारिता को बहुआयामी और अनन्त बना दिया है। आज कोई भी जानकारी पलक झपकते उपलब्ध की और कराई जा सकती है। मीडिया आज बहुत सशक्त, स्वतन्त्र और प्रभावकारी हो गया है। पत्रकारिता की पहुँच और आभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का व्यापक इस्तेमाल आमतौर पर सामाजिक सरोकारों और भलाई से ही जुड़ा है। इंटरनेट के सम्बंध में उन्होंने कहा कि इण्टरनेट की व्यापकता और उस तक सार्वजनिक पहुँच के कारण उसका दुष्प्रयोग भी होने लगा है। इंटरनेट के उपयोगकर्ता निजी भड़ास निकालने तथा आपत्तिजनक प्रलाप करने के लिए इस उपयोगी साधन का गलत इस्तेमाल करने लगे हैं। यही कारण है कि यदा-कदा मीडिया के इन बहुपयोगी साधनों पर अंकुश लगाने की बहस भी छिड़ जाती है। गनीमत है कि यह बहस सुझावों और शिकायतों तक ही सीमित रहती है। उस पर अमल की नौबत नहीं आने पाती। लोकतन्त्र के हित में यही है कि जहाँ तक हो सके पत्रकारिता को स्वतन्त्र और निर्बाध रहने दिया जाए, और पत्रकारिता का अपना हित इसमें है कि वह आभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का उपयोग समाज और सामाजिक सरोकारों के प्रति अपने दायित्वों को ईमानदारी से निवर्हन करते रहे।

rkpnews@desk

Recent Posts

अखिलेश यादव ने फॉर्म-7 को लेकर चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया और…

27 minutes ago

‘स्वच्छता ही सेवा’ शिविर: संत कबीर नगर में NSS की जागरूकता रैली और सफाई अभियान

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्थानीय…

28 minutes ago

लोकसभा में उठा यूपी की चिकित्सा अवसंरचना का मुद्दा

देवरिया सदर अस्पताल, बलिया मेडिकल कॉलेज और रिक्त पदों पर सरकार का जवाब बलिया (राष्ट्र…

31 minutes ago

लखनऊ समेत यूपी की 18 जिला अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी, कचहरी परिसरों में सघन चेकिंग

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। राजधानी लखनऊ में कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने…

43 minutes ago

Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana: 25 लाख महिलाओं को 10-10 हजार ट्रांसफर, अब 2 लाख की प्रक्रिया शुरू

बिहार (राष्ट्र की परम्परा)। बिहार में Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana के तहत महिलाओं को आर्थिक…

52 minutes ago

‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान: चिकित्सकों व NSS स्वयंसेवकों ने किया पौधारोपण

सिकंदरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। पर्यावरण संरक्षण और मातृ सम्मान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने…

1 hour ago