11 जनवरी के ऐतिहासिक निधन: वे महान व्यक्तित्व जिन्होंने भारत और विश्व को दिशा दी
रेखा कामत (निधन: 11 जनवरी 2022)
रेखा कामत भारतीय सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री थीं, जिन्होंने विशेष रूप से क्षेत्रीय और समानांतर सिनेमा में अपनी सशक्त पहचान बनाई। उनका जन्म कर्नाटक के तटीय क्षेत्र में हुआ था, जहाँ की सांस्कृतिक विविधता ने उनके अभिनय को गहराई दी। रेखा कामत ने अपने करियर में नारी पात्रों को संवेदनशीलता और यथार्थ के साथ प्रस्तुत किया। वे केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर बनी फिल्मों का भी हिस्सा रहीं। रंगमंच से लेकर सिनेमा तक, उन्होंने अभिनय को समाज से जोड़ने का प्रयास किया। भारतीय कला और संस्कृति के संरक्षण में उनका योगदान उल्लेखनीय माना जाता है।
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दूधनाथ सिंह (निधन: 11 जनवरी 2018)
दूधनाथ सिंह हिंदी साहित्य के अत्यंत महत्वपूर्ण कथाकार, आलोचक और विचारक थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद में हुआ। उन्होंने कथा साहित्य को केवल कहानी कहने तक सीमित न रखते हुए उसे वैचारिक प्रतिरोध और सामाजिक चेतना का माध्यम बनाया। उनके उपन्यास और कहानियाँ सत्ता, व्यवस्था और व्यक्ति के द्वंद्व को गहराई से उजागर करती हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में अध्यापन भी किया और अनेक छात्रों को आलोचनात्मक दृष्टि दी। साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में उनका योगदान और वैचारिक हस्तक्षेप हिंदी साहित्य की धरोहर है। वे साहित्य को समाज परिवर्तन का औजार मानते थे।
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सर एडमंड हिलेरी (निधन: 11 जनवरी 2008)
सर एडमंड हिलेरी का जन्म ऑकलैंड, न्यूज़ीलैंड में हुआ था। वे विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही और समाजसेवी थे, जिन्होंने 1953 में शेरपा तेनज़िंग नोर्गे के साथ माउंट एवरेस्ट पर पहली सफल चढ़ाई कर इतिहास रचा। यह उपलब्धि केवल साहस का प्रतीक नहीं थी, बल्कि मानव संकल्प की सीमा को परिभाषित करने वाला क्षण थी। पर्वतारोहण के बाद हिलेरी ने अपना जीवन हिमालयी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए समर्पित कर दिया। नेपाल और हिमालयी समाज के लिए उनका योगदान उन्हें एक महान मानवतावादी बनाता है।
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राम चतुर मल्लिक (निधन: 11 जनवरी 1990)
राम चतुर मल्लिक ध्रुपद-धमार गायन शैली के महान गायक थे। उनका जन्म बिहार के दरभंगा जिले में हुआ, जो भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक समृद्ध परंपरा का केंद्र रहा है। उन्होंने दरभंगा घराने की परंपरा को न केवल जीवित रखा बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाया। उनकी गायकी में शुद्धता, अनुशासन और आध्यात्मिक गहराई स्पष्ट झलकती थी। उन्होंने अनेक शिष्यों को प्रशिक्षित कर भारतीय शास्त्रीय संगीत की विरासत आगे बढ़ाई। संगीत के क्षेत्र में उनका योगदान भारतीय सांस्कृतिक धरोहर का अमूल्य हिस्सा है।
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लाल बहादुर शास्त्री (निधन: 11 जनवरी 1966)
लाल बहादुर शास्त्री स्वतंत्र भारत के तीसरे प्रधानमंत्री थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के मुगलसराय (वर्तमान पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर), चंदौली जिले में हुआ। सादगी, ईमानदारी और दृढ़ नेतृत्व उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। “जय जवान, जय किसान” का नारा देकर उन्होंने देश की कृषि और रक्षा दोनों को नई दिशा दी। 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उनका नेतृत्व ऐतिहासिक रहा। ताशकंद समझौते के बाद उनका आकस्मिक निधन राष्ट्र के लिए गहरा आघात था। वे भारतीय राजनीति में नैतिक मूल्यों के प्रतीक माने जाते हैं।
अजय घोष (निधन: 11 जनवरी 1962)
अजय घोष भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ और उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई। वे पार्टी के महासचिव भी रहे और मजदूरों, किसानों तथा वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष किया। उनका जीवन विचारधारा, संगठन और अनुशासन का उदाहरण था। उन्होंने भारतीय राजनीति में वैचारिक स्पष्टता और जनआंदोलन की भूमिका को मजबूत किया। अजय घोष का योगदान भारत में वामपंथी राजनीति की नींव को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण रहा।
