गंगे च यमुने चैव गोदावरी,
सरस्वती, नर्मदे सिन्धु कावेरी,
जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु।
प्रसन्न होते देवगण और गुरु।
हमेशा स्नान के साथ यह मंत्र
सदा से ही जोड़ा जाता रहा है,
पर आजकल तो स्नान करने
का कोई महत्व ही नहीं रहा है।
कैसे कैसे करते हम बहाना है,
ठंड आ गई, रोज़ न नहाना है,
शेर कभी स्नान नहीं किया करते,
यह भी करते अच्छा बहाना है।
वैसे दशविधि स्नान एक
पवित्र धार्मिक विधि है,
देवी-देवता को दस विधि
से स्नान कराया जाता है।
जल, पंचामृत, पंचगव्य, दही,
घी, शहद, शक्कर, हल्दी,
फल का रस और गंगा जल
का प्रयोग किया जाता है।
आदित्य इस स्नान मंत्र का मूर्ति
स्थापना, अभिषेक, विशेषतया
पर्व पर शुद्धीकरण,आध्यात्मिक
शक्ति प्राप्ति हेतु किया जाता है।
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