हर देश की अपनी तिथि, पर माता-पिता समान आदर
शिक्षक वे व्यक्ति जो केवल ज्ञान नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाते हैं। मानव सभ्यता में शिक्षक का स्थान सदैव सर्वोच्च माना गया है। “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः” — यह मंत्र हमें बताता है कि शिक्षक केवल शिक्षणकर्ता नहीं, बल्कि सृष्टि का सार समझाने वाले पथप्रदर्शक हैं। इसी सम्मान को अभिव्यक्त करने हेतु विश्वभर में “शिक्षक दिवस” (Teachers’ Day) मनाया जाता है।
परंतु क्या आप जानते हैं कि हर देश में शिक्षक दिवस की तिथि अलग होती है? आइए, समझते हैं क्यों और कैसे यह परंपरा वैश्विक रूप में विकसित हुई।
शिक्षक: समाज की आत्मा और विकास का आधार शिक्षक समाज के निर्माण की सबसे मजबूत नींव हैं। वे केवल पुस्तक का ज्ञान नहीं देते, बल्कि बच्चों के भीतर विचार, अनुशासन, संवेदना और नैतिकता का बीज बोते हैं।
आज जब डिजिटल शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीकी क्रांति तेज़ी से बदल रही है, तब भी शिक्षक की भूमिका अपरिवर्तनीय है — क्योंकि केवल शिक्षक ही मानवीय संवेदना और सोच को दिशा दे सकते हैं।
इसी योगदान को सम्मान देने के लिए दुनिया के लगभग हर देश में किसी-न-किसी रूप में शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
अन्तरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस — 5 अक्टूबर की ऐतिहासिक भूमिका
हर वर्ष 5 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय शिक्षक दिवस (World Teachers’ Day) मनाया जाता है।
यह परंपरा UNESCO द्वारा 1994 में शुरू की गई थी।
इस दिन को चुने जाने के पीछे एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कारण है —
5 अक्टूबर 1966 को UNESCO और ILO (International Labour Organization) ने एक सम्मेलन में “Recommendation concerning the Status of Teachers” को अपनाया था।
यह दस्तावेज़ शिक्षकों के अधिकारों, कर्तव्यों, प्रशिक्षण, कार्य स्थिति और सामाजिक सम्मान से संबंधित था।
इस दिवस का उद्देश्य है:
शिक्षकों के योगदान को वैश्विक स्तर पर पहचान देना।
शिक्षा की गुणवत्ता में उनकी भूमिका को स्वीकार करना।
सरकारों और समाज को शिक्षकों के हित में नीतियाँ बनाने के लिए प्रेरित करना।
UNESCO हर वर्ष इस दिन की एक थीम (Theme) घोषित करता है।
उदाहरण के लिए —2024 की थीम थी: “Valuing teachers’ voices: Towards a new social contract for education”
(अर्थात्: “शिक्षकों की आवाज़ का मूल्य — शिक्षा के लिए नया सामाजिक अनुबंध।”)
यह दिन केवल समारोह नहीं, बल्कि विश्वभर के शिक्षकों को सम्मान और प्रेरणा देने का प्रतीक है।
भारत में शिक्षक दिवस — 5 सितंबर की अनूठी परंपरा
भारत में शिक्षक दिवस 5 सितंबर को मनाया जाता है, जो देश के महान दार्शनिक, विद्वान और दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के रूप में जाना जाता है।
राधाकृष्णन और शिक्षक दिवस की प्रेरणा
डॉ. राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था। वे अपने समय के प्रमुख शिक्षाविद्, दार्शनिक और मानवतावादी थे।
जब वे राष्ट्रपति बने, तो उनके विद्यार्थियों ने उनका जन्मदिन मनाने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा —“यदि आप वास्तव में मेरा सम्मान करना चाहते हैं, तो इस दिन को सभी शिक्षकों के सम्मान में मनाइए।”
तभी से 1962 से यह दिन “शिक्षक दिवस” के रूप में मनाया जाने लगा।
आज यह परंपरा भारत के हर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में गहरी जड़ें जमा चुकी है।
शिक्षक दिवस के समारोह और महत्व
5 सितंबर को देशभर के स्कूलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित होते हैं।
विद्यार्थी अपने शिक्षकों के सम्मान में भाषण, कविता, नाटक और गीत प्रस्तुत करते हैं।
कई जगह “रोल रिवर्सल” होता है — छात्र शिक्षक बनकर पढ़ाते हैं।
शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (National Teachers’ Awards) से सम्मानित किया जाता है।
इस दिन शिक्षकों को केवल मंच पर सम्मान नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से आदर मिलता है — क्योंकि शिक्षा केवल पेशा नहीं, एक पवित्र मिशन है।
दुनिया के विभिन्न देशों में शिक्षक दिवस की तिथियाँ
हर देश का सांस्कृतिक इतिहास अलग है, इसलिए शिक्षक दिवस की तिथि भी भिन्न है।
नीचे कुछ प्रमुख देशों की तिथियाँ दी गई हैं:
देश / क्षेत्र शिक्षक दिवस की तिथि विशेष कारण या टिप्पणी
भारत 5 सितंबर डॉ. राधाकृष्णन का जन्मदिन
रूस 5 अक्टूबर UNESCO के अनुरूप 1994 से
चीन 10 सितंबर शिक्षा के नए सत्र के आरंभ से जुड़ा
अमेरिका मई का पहला सप्ताह “Teacher Appreciation Week” के रूप में
ईरान 2 मई प्रसिद्ध प्रोफेसर की स्मृति में
इंडोनेशिया 25 नवंबर “Hari Guru” के रूप में राष्ट्रीय उत्सव
सिंगापुर 1 सितंबर स्कूल आधा दिन चलते हैं
अर्जेंटीना 11 सितंबर शिक्षाविद् डोमिंगो सर्मिएंटो की पुण्यतिथि
पोलैंड 14 अक्टूबर शिक्षा मंत्रालय की स्थापना तिथि
ऑस्ट्रेलिया अक्टूबर का अंतिम शुक्रवार राज्यवार परंपराएँ भिन्न
हंगरी जून का पहला शनिवार स्थानीय शिक्षण दिवस
अरब देश (कतर, ओमान आदि) 28 फरवरी क्षेत्रीय एकरूपता यह सूची यह दर्शाती है कि शिक्षक दिवस का स्वरूप वैश्विक है, लेकिन इसका उत्सव सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से विविध।
क्या शिक्षक दिवस पर अवकाश होता है?
कई देशों में शिक्षक दिवस एक औपचारिक सम्मान दिवस होता है, न कि सार्वजनिक अवकाश।
भारत में 5 सितंबर को विद्यालय खुले रहते हैं, केवल विशेष आयोजन होते हैं।
सिंगापुर में आधे दिन की छुट्टी रहती है, पर राष्ट्रीय अवकाश नहीं।
रूस, पोलैंड, अमेरिका में सामान्य दिनचर्या रहती है।कुछ देशों में ही इसे अवकाश दिवस माना जाता है, पर वह अपवाद है।इससे स्पष्ट है कि शिक्षक दिवस का उद्देश्य अवकाश देना नहीं, बल्कि “सम्मान देना” है।
विश्व और भारत में शिक्षक दिवस मनाने के तरीके
विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, भाषण, निबंध प्रतियोगिता आयोजित होती हैं।
विद्यार्थी शिक्षकों को कार्ड, उपहार या पौधे भेंट करते हैं।
समारोहों में शिक्षकों की जीवन यात्रा और योगदान साझा किए जाते हैं।
कुछ देशों में शैक्षिक संगोष्ठियाँ और कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की जाती हैं।
सोशल मीडिया पर #TeachersDay ट्रेंड करता है, जहां लोग अपने पसंदीदा शिक्षकों को टैग करके धन्यवाद देते हैं।
भारत में तो कई विद्यालय “गुरु पूजन” की भारतीय परंपरा को पुनर्जीवित करते हैं — जिससे शिक्षक-छात्र संबंध का आध्यात्मिक पक्ष भी मजबूत होता है।
शिक्षक दिवस का सामाजिक और शैक्षिक संदेश
शिक्षक दिवस हमें यह याद दिलाता है कि शिक्षा केवल ज्ञानार्जन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया है।
यह दिन हमें प्रेरित करता है कि —
हम अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन का सम्मान करें,
शिक्षा को केवल डिग्री नहीं, जीवन का मूल समझें,और यह स्वीकार करें कि शिक्षक ही समाज की आत्मा हैं।
शिक्षक सम्मान की चुनौतियाँ और भविष्य की दिशा
आज के युग में शिक्षकों के सामने कई चुनौतियाँ हैं —
तकनीकी परिवर्तन के साथ तालमेल,
सामाजिक अपेक्षाएँ,और कभी-कभी उचित मान-सम्मान की कमी।
इसलिए अब आवश्यकता है कि —
शिक्षकों को नीतिगत और आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए।
नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुसार उन्हें प्रशिक्षण, संसाधन और सम्मान मिले।
डिजिटल माध्यमों के साथ-साथ मानवीय मूल्य शिक्षा को भी समान महत्व दिया जाए।
भविष्य में शिक्षक केवल पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि “लाइफ कोच” और “नॉलेज नेविगेटर” के रूप में उभरेंगे।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि हर युग में शिक्षक ही वह दीपक हैं जो अंधकार को मिटाते हैं।
गुरु का आदर, मानवता का आदर शिक्षक दिवस केवल एक दिन नहीं, बल्कि एक भावना है —
ज्ञान, आभार और प्रेरणा की।
विश्व स्तर पर 5 अक्टूबर को UNESCO ने इसे स्थापित किया,
जबकि भारत में 5 सितंबर को यह अपने सांस्कृतिक आदर्श के रूप में मनाया जाता है।
हर देश में तिथि भले अलग हो, पर उद्देश्य एक ही
“शिक्षकों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान।”जब हम अपने गुरु का आदर करते हैं, तब वास्तव में हम ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता की जड़ों का आदर करते हैं।
और यही शिक्षक दिवस का सच्चा संदेश है —
“गुरु ही वह सूर्य हैं जो ज्ञान की रोशनी से संसार को आलोकित करते हैं।”
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