Wednesday, February 4, 2026
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छात्रों के लिए प्रेरणा: 19 जनवरी को जन्मे महान विचारक

19 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व: महत्वपूर्ण जन्म इतिहास


जगजीत सिंह दर्दी (1949)
जगजीत सिंह दर्दी पंजाबी पत्रकारिता के सशक्त स्तंभ माने जाते हैं। वे प्रसिद्ध पंजाबी दैनिक चढ़दीकला के एडिटर-इन-चीफ रहे हैं और शिक्षा, मीडिया तथा सामाजिक सरोकारों में उनका योगदान उल्लेखनीय है। उन्होंने पंजाबी भाषा को जनसंवाद का सशक्त माध्यम बनाया। पत्रकारिता के साथ-साथ वे शिक्षाविद् भी रहे और अनेक सामाजिक मुद्दों पर निर्भीक लेखन किया। उनके नेतृत्व में चढ़दीकला ने ग्रामीण, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय विषयों को प्रमुखता दी। पंजाबी समाज में जागरूकता और वैचारिक चेतना के प्रसार में उनका योगदान ऐतिहासिक माना जाता है।
सौमित्र चटर्जी (1935)
सौमित्र चटर्जी भारतीय सिनेमा, विशेषकर बंगाली फिल्मों के महान अभिनेता थे। सत्यजीत रे की अपूर संसार से उन्होंने अभिनय यात्रा शुरू की और अपु त्रयी से अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। उनकी अभिनय शैली में सादगी, गहराई और बौद्धिक संवेदना का अद्भुत संगम था। उन्होंने सैकड़ों फिल्मों, नाटकों और कविताओं में योगदान दिया। पद्म भूषण, दादा साहेब फाल्के पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त किए। सौमित्र चटर्जी को भारतीय सिनेमा में कलात्मक अभिनय का मानक स्थापित करने वाला कलाकार माना जाता है।
ज़ेवियर पेरेज़ डी कुईयार (1920)
ज़ेवियर पेरेज़ डी कुईयार संयुक्त राष्ट्र संघ के पाँचवें महासचिव रहे। उन्होंने 1982 से 1991 तक यूएन का नेतृत्व किया और शीत युद्ध के अंतिम दौर में कूटनीतिक संतुलन बनाए रखा। ईरान-इराक युद्ध, अफगान संकट और मध्य अमेरिका में शांति प्रयासों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। वे संवाद, सहमति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रबल समर्थक थे। उनके नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक विश्वसनीयता बढ़ी। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के इतिहास में उन्हें एक संतुलित और दूरदर्शी नेता के रूप में याद किया जाता है।
कैफ़ी आज़मी (1919)
कैफ़ी आज़मी उर्दू साहित्य और हिंदी सिनेमा के प्रतिष्ठित शायर थे। वे प्रगतिशील लेखक आंदोलन के प्रमुख स्तंभों में शामिल रहे। उनकी शायरी में सामाजिक न्याय, प्रेम, मानवीय संवेदना और क्रांति की आवाज़ गूंजती है। औरत, मकान, दायर जैसे संग्रह अत्यंत चर्चित रहे। फ़िल्मी गीतों में भी उन्होंने गहरी साहित्यिक छाप छोड़ी। कैफ़ी आज़मी ने कविता को जनआंदोलन से जोड़ा और साहित्य को सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया।
विष्णु सखाराम खांडेकर (1898)
विष्णु सखाराम खांडेकर मराठी साहित्य के महान लेखक थे। उन्हें ययाति उपन्यास के लिए विशेष ख्याति मिली, जो मानव जीवन, नैतिकता और कर्तव्य पर गहन विमर्श करता है। वे ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हुए। खांडेकर की लेखनी में दर्शन, समाज और संस्कृति का संतुलित समावेश मिलता है। उन्होंने मराठी साहित्य को राष्ट्रीय पहचान दिलाई और भारतीय साहित्य में बौद्धिक गंभीरता का नया आयाम जोड़ा।
जी. सुब्रह्मण्यम अय्यर (1855)
जी. सुब्रह्मण्यम अय्यर भारत के अग्रणी पत्रकार और बुद्धिजीवी थे। उन्होंने द हिंदू समाचार पत्र की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे सामाजिक सुधार, शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना के समर्थक थे। उनकी पत्रकारिता तथ्य, तर्क और नैतिकता पर आधारित थी। ब्रिटिश शासन के दौरान उन्होंने प्रेस को जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों का सशक्त माध्यम बनाया। भारतीय पत्रकारिता के इतिहास में उनका स्थान अत्यंत सम्माननीय है।
एडगर एलन पो (1809)
एडगर एलन पो अमेरिकी साहित्य के महान लेखक, कवि और आलोचक थे। उन्हें रहस्य, हॉरर और डिटेक्टिव फिक्शन का जनक माना जाता है। द रैवन, द टेल-टेल हार्ट जैसी रचनाएँ विश्व साहित्य में अमर हैं। उनकी लेखन शैली मनोवैज्ञानिक गहराई और प्रतीकात्मकता से भरपूर थी। पो ने आधुनिक लघुकथा और जासूसी साहित्य की नींव रखी। उनका प्रभाव आज भी वैश्विक साहित्य पर स्पष्ट दिखाई देता है।
जेम्स वाट (1736)
जेम्स वाट स्कॉटलैंड के महान आविष्कारक और यांत्रिक अभियंता थे। उन्होंने भाप इंजन में क्रांतिकारी सुधार कर औद्योगिक क्रांति को गति दी। उनके नाम पर शक्ति की इकाई “वाट” रखी गई। उनके आविष्कारों ने कारखानों, परिवहन और उत्पादन प्रणाली को नई दिशा दी। आधुनिक औद्योगिक समाज के निर्माण में जेम्स वाट की भूमिका ऐतिहासिक और निर्णायक मानी जाती है।

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