गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि एवं प्राकृतिक विज्ञान संस्थान में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के अंतर्गत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य 1947 के भारत विभाजन के दौरान हुई मानवीय त्रासदी, विस्थापन और पीड़ा को याद करना तथा नई पीढ़ी को इसके सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय पहलुओं से अवगत कराना था। इस अवसर पर विभाजन से जुड़े घटनाक्रम पर आधारित एक फिल्म भी प्रदर्शित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने दीप प्रज्वलन कर किया। उन्होंने कहा, “भारत का विभाजन केवल भू-भाग का बंटवारा नहीं था, बल्कि करोड़ों परिवारों की जड़ों को उखाड़ देने वाली अमानवीय त्रासदी थी। हमें पीड़ितों के साहस और संघर्ष से सीख लेनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां न दोहराई जाएं।”
विभाजन के प्रत्यक्षदर्शी चैत राम पाहूजा, जो उस समय कराची के जिला साखर के गाँव दौड़ला के निवासी थे, ने भावुक होकर कहा, “जिन्ना और जवाहर की जिद पर हमारी सभ्यता तार-तार हो गई।” उन्होंने बताया कि कैसे लोग घर-बार और खेत-खलिहान पड़ोसियों के भरोसे छोड़कर शून्य से नई जिंदगी शुरू करने को मजबूर हुए, और कैसे मेहनत व ईमानदारी से उन्होंने पुनः जीवन में मुकाम हासिल किया।
विशिष्ट अतिथि अंजना राजपाल ने कहा कि विभाजन में पंजाबियों को पंजाब और बंगालियों को बंगाल मिला, लेकिन सिंधियों को पूरे भारत में बिखेर दिया गया, जिससे उनकी सांस्कृतिक एकता को गहरी चोट पहुँची। नरेश करमचंदानी ने भी अपने पूर्वजों की विभाजन की पीड़ादायक स्मृतियाँ विद्यार्थियों से साझा कीं।
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. नूपुर सिंह और संचालन डॉ. सरोज चौहान ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रामवन्त गुप्ता ने दिया। विषय प्रवर्तन डॉ. सत्यपाल सिंह ने किया। कार्यक्रम में एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. स्मृति मल्ल, डॉ. कुसुम रावत, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. हर्ष देव वर्मा, डॉ. सुशील सिंह सहित विभिन्न विभागों के विद्यार्थी व स्वयंसेवक शामिल हुए और शांति, एकता व भाईचारे के संकल्प को दोहराया।
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