Sunday, February 15, 2026
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2026 पासपोर्ट रैंकिंग में भारत: संकेत, सबक और भविष्य की राह

हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026: भारत की 10 पायदान की छलांग, कूटनीतिक सफलता या चेतावनी?


वीज़ा-फ्री सुविधा में बढ़ोतरी, दो देशों की कटौती और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में गहन विश्लेषण


वैश्विक दौर में पासपोर्ट अब सिर्फ यात्रा का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि किसी देश की कूटनीतिक विश्वसनीयता, आर्थिक मजबूती और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चुका है। Henley & Partners द्वारा जारी हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारत ने 10 पायदान की उल्लेखनीय छलांग लगाते हुए 85वें से 75वें स्थान तक का सफर तय किया है। यह उपलब्धि भारत की सक्रिय कूटनीति और वैश्विक स्वीकार्यता में सुधार का संकेत देती है।
भारतीय पासपोर्ट धारकों को अब 56 देशों में वीज़ा-फ्री या वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा मिल रही है। हालांकि, इसी अवधि में दो देशों द्वारा वीज़ा-फ्री सुविधा समाप्त किया जाना एक गंभीर चेतावनी भी है। यह सवाल स्वाभाविक है कि जब दो देशों की सुविधा घटी, तो रैंकिंग कैसे सुधरी? और 2006 में मिली 71वीं सर्वोच्च रैंक अब तक क्यों नहीं दोहराई जा सकी?

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हेनले पासपोर्ट इंडेक्स क्या है?
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स विश्व के लगभग 200 पासपोर्ट को इस आधार पर रैंक करता है कि उनके नागरिक कितने देशों में बिना पूर्व वीज़ा प्रवेश कर सकते हैं। यह रैंकिंग इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के डेटा पर आधारित होती है और पूरी तरह तुलनात्मक (relative) होती है—यानी किसी एक देश की स्थिति दूसरों के प्रदर्शन से भी प्रभावित होती है।
दो देश घटे, फिर भी रैंक कैसे सुधरी?
यह विरोधाभास दिखता है, पर वास्तविकता में रैंकिंग सापेक्ष होती है। यदि अन्य देशों की वीज़ा-फ्री पहुंच में ज्यादा गिरावट आती है, तो सीमित सुधार या स्थिरता के बावजूद भारत की रैंक ऊपर जा सकती है।
तारीफ़ का पहलू: अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और कैरिबियन देशों के साथ भारत के संबंध मजबूत हुए।
आलोचना का पहलू: 56 देशों की पहुंच अब भी वैश्विक औसत और शीर्ष देशों से कम है।

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किन दो देशों ने वीज़ा-फ्री सुविधा समाप्त की?
ईरान: नवंबर 2025 में धोखाधड़ी, मानव तस्करी और फर्जी नौकरी मामलों के कारण वीज़ा-फ्री सुविधा बंद।
बोलीविया: पहले वीज़ा-ऑन-अराइवल, अब 2026 से ई-वीज़ा अनिवार्य, जिससे यह वीज़ा-फ्री श्रेणी से बाहर हो गया।
यह घटनाक्रम बताता है कि पासपोर्ट की ताकत सिर्फ कूटनीति से नहीं, बल्कि नागरिकों के आचरण और आव्रजन प्रबंधन से भी जुड़ी है।
शीर्ष देशों से तुलना
पहला स्थान: सिंगापुर – 192 देश
दूसरा: जापान, दक्षिण कोरिया – 187
तीसरा: स्वीडन, यूएई
चौथा: फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, स्विट्ज़रलैंड
पांचवां: ऑस्ट्रिया, ग्रीस, माल्टा, पुर्तगाल
स्पष्ट है कि भारत अभी भी शीर्ष देशों से काफी पीछे है।
2006 की सर्वोच्च रैंक क्यों नहीं दोहराई गई?
2006 में वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य आज जितना सख्त नहीं था। पिछले दो दशकों में आतंकवाद, अवैध आव्रजन, शरणार्थी संकट और डिजिटल निगरानी के कारण वीज़ा नियम सख्त हुए हैं। जनसंख्या-समृद्ध देशों पर अतिरिक्त जांच स्वाभाविक हो गई है।
दक्षिण एशिया और वैश्विक संदर्भ
दक्षिण एशिया में भारत की स्थिति पाकिस्तान (97वें स्थान) से बेहतर है, लेकिन वैश्विक औसत से अब भी पीछे है। यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक अवसरों के साथ-साथ वैश्विक भरोसा भी अहम है।

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हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारत की 10 पायदान की छलांग निश्चित रूप से प्रशंसनीय है। यह कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक छवि में सुधार का संकेत देती है। वहीं, दो देशों द्वारा वीज़ा-फ्री सुविधा समाप्त होना चेतावनी है कि नागरिक आचरण, प्रवासी प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय विश्वास पर सतत ध्यान जरूरी है।
यह रैंकिंग भारत के लिए अवसर भी है और आत्ममंथन का क्षण भी, ताकि आने वाले वर्षों में वह न केवल 2006 की रैंक को पार करे, बल्कि वैश्विक गतिशीलता में नई पहचान स्थापित करे।

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