बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। भारत मसालों की भूमि के रूप में जाना जाता है और यहां 63 प्रकार की मसाला प्रजातियों की खेती होती है। भारत मसालों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक देश है। कुल उत्पादन का 80-90% घरेलू खपत में उपयोग होता है जबकि शेष 130 देशों में निर्यात होता है। उत्तर प्रदेश में मसाला फसलों के लिए उन्नत बीज, तकनीक, प्रशिक्षण और शोध के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि हो रही है। राज्य में हल्दी, अदरक, मिर्च, प्याज (खरीफ में) और धनिया, सौंफ, जीरा, मेथी, लहसुन, अजवाइन आदि (रबी में) की खेती की जाती है। राज्य में हल्दी की 5, धनिया की 2 और मेथी की 3 उन्नत प्रजातियां विकसित की गई हैं। हल्दी में करक्यूमिन, अदरक में सोंठ, लहसुन में कोलेस्ट्रॉल कम करने वाले तत्व पाए जाते हैं। मिर्च सबसे अधिक निर्यात की जाने वाली मसाला फसल है। उन्नत विधियों से प्रति हेक्टेयर मसालों का अच्छा उत्पादन और लाभ प्राप्त हो रहा है, जैसे —
हल्दी: 6-9 माह में खुदाई, अदरक: सोंठ रूप में उपयोग,लहसुन: 150-200 कुन्तल/हेक्टेयर, धनिया: सिंचित में 18-20 कुन्तल, मेथी: 15-20 कुन्तल (दाना), 70-80 कुन्तल (पत्तियां),जीरा, अजवाइन, सौंफ: औषधीय गुणों से भरपूर। मसालों की खेती न केवल अधिक आय देती है बल्कि प्रसंस्करण उद्योगों के माध्यम से रोजगार भी बढ़ाती है। यह किसानों की आय दोगुनी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के नगर पंचायत मगहर में नालों की सफाई…
कपरवार/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l मछली पालन, झींगा पालन, मछली विक्रेताओं, मत्स्य सहकारी समितियों, मछुआरा समूहों और…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। तहसील खलीलाबाद, मेंहदावल और धनघटा के अंतर्गत आने वाली…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा-2025 को निष्पक्ष, पारदर्शी,…
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के सात विद्यार्थियों का चयन इको नेटवर्क…
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। प्रभादेवी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खलीलाबाद के शारीरिक शिक्षा संकाय (बीपीएड)…