माया मोह से मन को हटा लो,
सुधार लो जीवन धीरे धीरे।
ज़िन्दगी बीत रही है पल पल,
उम्र हमारी ढलती प्रतिपल,
चौबीस घंटे धीरे धीरे,
माया मोह से मन को हटा लो,
सुधार लो जीवन धीरे धीरे।
बचपन जाये जवानी आये,
बूढ़े भी होंगे धीरे धीरे,
असर भी होगा धीरे धीरे,
माया मोह से मन को हटा लो,
सुधार लो जीवन धीरे धीरे।
हाथ पैर में बची न ताक़त,
झुककर कमर हो गई टेढ़ी,
पता चलेगा धीरे धीरे,
माया मोह से मन को हटा लो,
सुधार लो जीवन धीरे धीरे।
इंद्रियाँ भी शिथिल हो जाएँग़ी,
आँख कान ना काम करेंगे,
दाँत गिरेंगे धीरे धीरे,
माया मोह से मन को हटा लो,
सुधार लो जीवन धीरे धीरे।
प्रथम स्वाँस से अंतिम क्षण तक,
आदित्य जिंदगी बची है थोड़ी,
जी भर के जी लेना धीरे धीरे,
माया मोह से मन को हटा लो,
सुधार लो जीवन धीरे धीरे।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र, आदित्य
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