Tuesday, January 13, 2026
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कला, राजनीति, साहित्य और स्वतंत्रता संग्राम के अमर नाम

12 जनवरी के ऐतिहासिक निधन

भारतीय और विश्व इतिहास में 12 जनवरी ऐसी तिथि है, जब कई महान व्यक्तित्वों का निधन हुआ, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। सिनेमा, साहित्य, राजनीति, शास्त्रीय संगीत और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ये नाम आज भी अपने योगदान के कारण स्मरण किए जाते हैं। आइए जानते हैं 12 जनवरी को हुए इन ऐतिहासिक निधनों के बारे में विस्तृत जानकारी।

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अमरीश पुरी (1929–2005) | भारतीय सिनेमा के कालजयी खलनायक
अमरीश पुरी का जन्म 22 जून 1932 को नवांशहर जिला, पंजाब, भारत में हुआ था। उन्होंने भारतीय सिनेमा में खलनायक की भूमिका को एक नई ऊँचाई दी। उनकी दमदार आवाज़, प्रभावशाली संवाद अदायगी और सशक्त अभिनय ने उन्हें हिंदी फिल्मों के सबसे यादगार विलेन में शामिल कर दिया।
‘मिस्टर इंडिया’ के मोगैम्बो, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘करण अर्जुन’ और ‘घायल’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी दर्शकों के ज़ेहन में जीवित हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में भी काम किया और भारतीय सिनेमा को वैश्विक पहचान दिलाने में योगदान दिया। 12 जनवरी 2005 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका अभिनय आज भी अमर है।

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रामकृष्ण हेगड़े (1926–2004) | कर्नाटक के विकास पुरुष
रामकृष्ण हेगड़े का जन्म सिद्धपुर, उत्तर कन्नड़ जिला, कर्नाटक, भारत में हुआ था। वे जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री रहे।
उन्होंने ग्रामीण विकास, पंचायती राज व्यवस्था और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष ध्यान दिया। उनके नेतृत्व में कर्नाटक ने सुशासन की नई दिशा पकड़ी। सादगी, ईमानदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी निष्ठा उन्हें अन्य नेताओं से अलग करती है। 12 जनवरी 2004 को उनके निधन से भारतीय राजनीति को एक दूरदर्शी नेता की क्षति हुई।
वी. आर. नेदुनचेज़ियन (1916–2000) | तमिल राजनीति के अनुभवी रणनीतिकार
वी. आर. नेदुनचेज़ियन का जन्म तिरुचिरापल्ली जिला, तमिलनाडु, भारत में हुआ था। वे तीन बार तमिलनाडु के कार्यवाहक मुख्यमंत्री रहे और द्रविड़ राजनीति के प्रमुख स्तंभ माने जाते थे।
उन्होंने शिक्षा, भाषा और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर प्रभावी भूमिका निभाई। तमिल अस्मिता और प्रशासनिक स्थिरता के लिए उनका योगदान उल्लेखनीय है। 12 जनवरी 2000 को उनका निधन हुआ।

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कुमार गंधर्व (1924–1992) | शास्त्रीय संगीत का विद्रोही स्वर
कुमार गंधर्व का जन्म बेलगांव जिला, कर्नाटक, भारत में हुआ था। वे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान गायक थे।
उन्होंने परंपरागत गायकी से हटकर नए प्रयोग किए और निर्गुण भक्ति संगीत को नई पहचान दी। गंभीर बीमारी के बावजूद उन्होंने संगीत साधना नहीं छोड़ी। उनकी गायकी आज भी संगीत प्रेमियों के लिए प्रेरणा है। 12 जनवरी 1992 को उनका निधन हुआ।
अगाथा क्रिस्टी (1890–1976) | रहस्य कथा की महारानी
अगाथा क्रिस्टी का जन्म टॉर्की, डेवोन, इंग्लैंड में हुआ था। वे विश्व की सबसे प्रसिद्ध जासूसी उपन्यासकारों में से एक थीं।
‘हरक्यूल पॉयरो’ और ‘मिस मार्पल’ जैसे पात्रों के माध्यम से उन्होंने रहस्य साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाई। उनके उपन्यास आज भी दुनिया भर में पढ़े जाते हैं। 12 जनवरी 1976 को उनका निधन हुआ, लेकिन उनका साहित्य अमर है।

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नरहर विष्णु गाडगिल (1894–1966) | स्वतंत्रता संग्राम और संविधान के निर्माता
नरहर विष्णु गाडगिल का जन्म नासिक जिला, महाराष्ट्र, भारत में हुआ था। वे स्वतंत्रता सेनानी, अर्थशास्त्री और संविधान सभा के सदस्य थे।
उन्होंने भारत की आर्थिक नीतियों और लोकतांत्रिक ढांचे के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 12 जनवरी 1966 को उनका निधन हुआ।
प्यारे लाल शर्मा (1884–1941) | क्रांतिकारी विचारधारा के प्रतीक
प्यारे लाल शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश, भारत में हुआ था। वे भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़े रहे और अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया।
उनका जीवन त्याग, साहस और राष्ट्रभक्ति का उदाहरण है। 12 जनवरी 1941 को उनका निधन हुआ।

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सूर्य सेन (1894–1934) | चिटगांव विद्रोह के नायक
सूर्य सेन का जन्म चिटगांव, बंगाल प्रेसीडेंसी (अब बांग्लादेश) में हुआ था। वे चिटगांव शस्त्रागार विद्रोह के प्रमुख नेता थे।
उनका लक्ष्य था भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराना। 12 जनवरी 1934 को फांसी देकर उन्हें शहीद कर दिया गया। उनका बलिदान आज भी प्रेरणा है।

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गोपीनाथ साहा (1906–1924) | बंगाल के युवा शहीद
गोपीनाथ साहा का जन्म पश्चिम बंगाल, भारत में हुआ था। वे मात्र 18 वर्ष की आयु में देश के लिए शहीद हो गए।
उनका साहस और बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के स्वर्णिम अध्यायों में शामिल है। 12 जनवरी 1924 को उनका निधन हुआ।

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