उत्तर प्रदेश मानव अधिकार आयोग की आगरा में संगोष्ठी, लंबित मामलों की सुनवाई के साथ जनता को किया अधिकारों के प्रति जागरूक
आगरा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)।उत्तर प्रदेश मानव अधिकार आयोग, लखनऊ द्वारा आगरा मंडल में मानव अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की गई। आयोग के माननीय सदस्य न्यायमूर्ति राजीव लोचन मेहरोत्रा एवं माननीय सदस्य बृजभूषण की उपस्थिति में आयुक्त सभागार, आगरा में मंडल से संबंधित लंबित मानव अधिकार मामलों की सुनवाई की गई। इसके साथ ही आमजन और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के लिए एक जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी में आयोग की बेंच ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश मानव अधिकार आयोग को प्रतिदिन बड़ी संख्या में जनशिकायतें प्राप्त होती हैं, जिनमें झोलाछाप डॉक्टरों, बिजली विभाग, पुलिस, श्रम विभाग और ग्रामीण स्वच्छता से जुड़े मामले प्रमुख हैं। आयोग ने कहा कि मानव अधिकारों का संरक्षण केवल कानून से नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता से भी संभव है।
झोलाछाप डॉक्टरों पर सख्ती जरूरी
माननीय सदस्यों ने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि झोलाछाप डॉक्टरों से जुड़ी शिकायतों में अक्सर देरी होती है। ऐसे मामलों में तत्काल FIR दर्ज करना अनिवार्य है, ताकि आरोपी को भागने का अवसर न मिले। यह सीधे तौर पर नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार से जुड़ा विषय है।
बिजली, पुलिस और श्रम विभाग की शिकायतें
संगोष्ठी में यह भी बताया गया कि बिजली विभाग द्वारा बिल बकाया होने पर मीटर काट दिए जाते हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को वैकल्पिक समाधान या सही जानकारी नहीं दी जाती। इसी तरह पुलिस विभाग में “क्षेत्र का मामला नहीं है” कहकर शिकायतें टाल दी जाती हैं, जो मानव अधिकारों का हनन है।
सबसे अधिक शिकायतें श्रम विभाग से संबंधित बताई गईं, जहां श्रमिकों के वेतन, सुरक्षा और सामाजिक अधिकारों का उल्लंघन आम है।
ग्रामीण क्षेत्रों में गंदगी और दबंगई
ग्रामीण इलाकों में सीवर लाइन टूटने, नालियों के जाम होने और गंदगी फैलने की समस्या पर भी आयोग ने चिंता जताई। कई मामलों में जांच के दौरान यह सामने आया कि दबंग लोगों द्वारा नाली निकासी रोकी जाती है। ऐसे मामलों में पुलिस की त्वरित कार्रवाई आवश्यक बताई गई, ताकि आमजन को राहत मिल सके।
मानव अधिकार आयोग में शिकायत कैसे करें
माननीय सदस्यों ने बताया कि कोई भी नागरिक उत्तर प्रदेश मानव अधिकार आयोग की आधिकारिक शिकायत पोर्टल, ट्विटर, अन्य सोशल मीडिया माध्यमों या सीधे आयोग कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज कर सकता है। शर्त यह है कि मामला पहले से किसी न्यायालय में लंबित न हो। आयोग ने जनता से अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और छोटी समस्याओं को समय रहते सामने लाएं।
बैठक में आगरा मंडल के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम मानव अधिकार जागरूकता की दिशा में एक प्रभावी कदम माना जा रहा है।
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